दरअसल रामकमलदास जगद्गुरु हैं, और इन्होंने वाराणसी के मोहल्ला खोजवां कश्मीरीगंज के प्राचीन श्रीराम मंदिर का निर्माण कराया है। इसी मंदिर परिसर में गुरुकुल का संचालन होता है। सन्यासी, बटुक इसी आश्रम में निवास करते हैं। यहां रहने वाले सन्यासियों ने मतदाता पहचान पत्र बनवाते समय पिता के कॉलम में जगदगुरु रामकमलदास का नाम दर्ज कराया है। यह सभी मतदाता अभी उसी आश्रम में निवास कर रहे हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन 2022 में निर्वाचकों के नाम और उनके विवरण संबंधी निर्देशों में बिंदु च के मुताबिक किसी भी धार्मिक संघ से संबंधित साधु, मठवासी और मठवासिनी जैसे व्यक्तियों के मामले में जो अपने पिता या माता का नाम नहीं देना चाहते हों, वह गुरु, धार्मिक संस्थान का नाम ही दे दें। यह पर्याप्त होगा। इसी नियमावली के तहत सभी का मतदाता पहचान पत्र बनवाया गया था।