नमामि गंगे अभियान को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को बड़ी पहल कर दी। इसके तहत जहां वाराणसी समेत 10 शहरों में स्मार्ट गंगा सिटी बनाने के कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की वहीं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के पहले चरण में रमना में प्रस्तावित 50 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए 156 करोड़ रुपये की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) पर भी मुहर लग गई। एसटीपी का निर्माण पीपीपी मॉडल पर कराया जाएगा। जल्द ही फर्म नामित कर इसका निर्माण शुरू कराया जाएगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू और जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री की उमा भारती ने स्मार्ट गंगा सिटी को लेकर गंगा किनारे बसे शहरों के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच मंडलायुक्त सभागार में बीच हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही, जल निगम के जीएम संजय सिंह, अपर नगर आयुक्त वीके द्विवेदी से यहां गंगा में गिर रहे सीवेज के बारे में जानकारी ली। कहा, एसटीपी पर काम जल्द शुरू कराया जाए।
बता दें कि जल निगम ने वर्ष 2014 में रमना में एसटीपी बनाने के का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। तब से प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा था। प्लांट की 40 फीसदी लागत केंद्र सरकार और 60 फीसदी निर्माण करने वाली फर्म उठाएगी। एसटीपी चालू होने के बाद जो मानक तय होगा, उसके अनुसार सीवेज फिल्टर होने पर बाकी 60 फीसदी धनराशि केंद्र किश्तों में फर्म को देगी। जल निगम के अधिशासी अभियंता एसके वर्मन ने बताया कि रमना में एसटीपी के निर्माण में कम से कम दो साल का समय लगेगा।