चौसट्ठी घाट पर उतारी आरती
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कहा कि पांच सौ वर्षों से भी अधिक समय से काशीवासी रंगोत्सव के बाद मां चौसठ्ठी देवी को गुलाल अर्पित करके धूलिवंदन के साथ ही दरबार को जागृत करते हैं। चौसट्ठी देवी के चरणों में गुलाल चढ़ाए बगैर काशी में रंगोत्सव की पूर्णता ही नहीं मानी जाती है।
चौसट्ठी घाट के गंगा तट पर स्वच्छता करके सभी से पर्यावरण संरक्षण की कामना की है। आयोजन के दौरान प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, मंदिर के महंत पं. चुन्नीलाल पंड्या एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।