असम की गायिका नाहिद आफरीन को मिले फतवे को लेकर शहर के मुस्लिम तबके की राय अलग-अलग है। एक ओर उलेमा जहां नाहिद के गाने बजाने को शरीयत के लिहाज से सही नहीं मान रहे हैं, वहीं उनका यह भी मानना है कि यूं ही हर बात पर फतवे जारी करना भी मुनासिब नहीं है।
कई का मानना है कि नाहिद को 46 उलेमा की ओर से फतवा नहीं बल्कि एक अपील जारी की गई है, चूंकि 25 मार्च को उसका कार्यक्रम जहां होना है, वहां मस्जिद और मदरसे हैं। लिहाजा, उलेमा ने अपील की है कि वो उस कार्यक्रम में शिरकत ना करें।
इस बारे में मुफ्ती मौलाना हारून रशीद नक्शेबंदी का कहना है कि इस्लाम में नाच गाने की इजाजत नहीं, शरई तौर पर ये गलत है। दूसरा पहलू ये भी है कि फतवा तक जारी किया जाना चाहिए जब कोई कुरान और हदीस की रौशनी में उस बाबत मुफ्ती से सवाल करे। फतवा लिखित में देना होता है।
मौलाना रियाज कादरी का कहना है कि फतवा बहुत जिम्मेदारी की चीज है। अगर कोई शरीयत के खिलाफ काम कर रहा है तो उसे पहले समझाया जाना चाहिए। उलेमा को चाहिए कि वो नाहिद के मां बाप को समझाएं।