काशी में मौजूद 13 अखाड़ों में भी होली का उल्लास छाया रहा। नागा साधु-संत अपने अराध्यदेव की पूजा कर एक दूसरे से होली खेली। जूना और आह्वान अखाड़े में नागा साधु-संतों ने अबीर गुलाल के साथ ही गाय के गोबर से भी होली खेले। सभी अखाड़े अपने आराध्य देवों की सुबह पूजा की। इसके बाद एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाए। जूना अखाड़े में भगवान दत्तात्रेय की पूजा हुई। ऐसे ही महानिर्वाणी, अटल, निरंजनी, आनंद, अग्नि आदि अखाड़ों में नागा साधु-संतों ने अपने अंदाज में होली खेली।