वाराणसी। ऊं भुजंगेशाय विद्यहे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्। मंत्रोच्चार के साथ श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर शहर से लेकर गांव तक नाग पंचमी मनाई गई। सावन के दूसरे सोमवार पर नागपंचमी के संयोग ने इसको और भी खास बना दिया। नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाए, जमकर पकवान खाए। कालसर्प दोष निवारण के लिए भी मंदिरों में अनुष्ठान किए गए। अखाड़ों में पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया। कहीं शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन करने के लिए दंगल हुआ तो कहीं महुअर का खेल सजा।
महर्षि पाणिनी के व्याकरण अष्टाध्यायी के महाभाष्य के साथ ही योगसूत्र की रचना करने वाले महर्षि पतंजलि की नगरी काशी में सोमवार को नाग देवता की सविधि पूजा की गई। लावा-दूध का भोग लगाया गया। कई घरों में गृहणियों ने भूमि पर नाग आकृतियों को उकेरा। नाग वंश का पूजन किया और शेष, वासुकी व जन्मेजय सर्पदोष-सर्पकोप से परिवार रक्षा की प्रार्थना की। इसके लिए लोकाचार के मुताबिक घर की चहारदीवारी पर गोबर से चौगोठ भी खींची गई। शेषावतार के रूप में काशी में तपस्या करने वाले महर्षि पतंजलि की तपस्थली नागकूप पर मेला भी गुलजार हुआ और शास्त्रार्थ भी हुआ।
जैतपुरा स्थित नागकूप पर तो कूूप में छलांग लगाने की भी श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। उधर, कूप के पीछे मेला गुलजार रहा। झूले-चर्खियों पर तो बच्चों, महिलाओं ने आनंद लिया ही। तरह-तरह के खिलौने, गुब्बारे और नाग देवता के चित्रों की भी दुकानें सजी रहीं। इसके अलावा नागेश्वर महादेव के अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दिन भर लावा-दूध का भोग अर्पित किया। नागकूप स्थित नागेश्वर महादेव की मंगला आरती के बाद भोर में चार बजे आम भक्तों के लिए पट खोल दिए गए। इसी के साथ नागेश्वर महादेव के दरबार में लावा-दूध चढ़ाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। पूजा के बाद रुद्राभिषेक किया गया। दर्शन और अभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। पुजारी कुंदन पांडेय ने बताया कि नाग पंचमी पर नागकूप के दर्शन से काल सर्पदोष का निवारण हो जाता है।
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे गुरु व बड़े गुरु का नाग ले लो की आवाज सुबह से ही गूंजने लगी थी। बच्चों ने नाग देवता की तस्वीर और लावा लेकर घर-घर बेचा। इन तस्वीरों को लोगाें ने पूजा के लिए खरीदा और घरों के दरवाजे पर चिपकाया।