टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता हॉकी टीम के सदस्य, काशी के लाल और ओलंपियन ललित उपाध्याय ने अपना मेडल बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा को समर्पित किया। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद ललित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, सिगरा स्टेडियम, यूपी कॉलेज होते हुए अपने गांव भगतपुर पहुंचे। एयरपोर्ट से आवास तक उनके स्वागत के लिए काशी की जनता उमड़ पड़ी। ढोल नगाडे़ से काशी के लाल का भव्य स्वागत हुआ। लोगों ने भारत माता की जय और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। ललित दो दिनों के लिए ही बनारस आए हैं। एयरपोर्ट पर उनके पिता सतीश उपाध्याय, मंत्री रविंद्र जायसवाल सहित बड़ी संख्या में लोगों ने फूल माला पहनाकर ढोल नगाड़े के साथ उनका स्वागत किया। वहां से ललित बाइक और कारों के काफिले के साथ बाबा के दर पर पहुंचे। दर्शन पूजन के बाद ललित ने कहा कि मेरा मेडल अब बाबा विश्वनाथ को समर्पित है।
सात महीने बाद बेटे को देख छलकीं आंखें
ललित को सात महीने बाद आंखों के सामने देखकर मां रीता उपाध्याय की आंखें छलक उठीं। उन्होंने सबसे पहले बेटे की आरती उतारी। ललित की भाभी रीमा और उनकी भतीजी ऋतंभरा ने दो किलो का केक काटकर स्वागत किया। बड़े भाई अमित भी राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी हैं।
ललित के नाम से बनेगा प्रवेश द्वार
ललित के स्वागत के लिए सिगरा स्टेडियम पहुंचे मंत्री रविंद्र जायसवाल ने गांव भगतपुर जाने वाली गली का नाम ललित के नाम से रखने और प्रवेश द्वार बनाने की घोषणा की।
कक्षा छह में कटने वाले था नाम
ललित की कर्मभूमि यूपी कॉलेज में भी उनका स्वागत हुआ। कॉलेज के प्रधानाचार्य ने उन्हें बधाई दी। ललित ने उदय प्रताप सिंह जूदेव की प्रतिमा पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया। पुराने दिनों को याद कर ललित ने बताया कि कक्षा छह में मेरा नाम कटने वाला था, लेकिन प्रधानाचार्य डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने पढ़ाई और खेल दोनों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। मैदान बंद होने पर भी अभ्यासकरने की छूट देते थे।
झलक पाने के लिए उमड़े लोग
ललित के गांव में खुशी का माहौल है। उनसे मिलने के लिए गांव के सैकड़ों लोग बाबतपुर रोड पर दुकानों पर बैठे थे। ग्रामीणों का कहना था कि ललित गांव का सबसे होनहार लड़का है। देश के लिए पदक जीतने पर और काशी का मान बढ़ाने पर हम लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।