कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने का प्रशिक्षण लेती मुस्लिम महिलाएं
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हिंद् और मुस्लिम संप्रदायों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच काशी में सात संमदर पार से आयी मुस्लिम बालाएं योग सीख रही हैं। तुम राम कहो, वो रहीम कहें दोनों की गरज अल्लाह से है। तुम दीन कहो वो धर्म कहें, मंशा तो उसी की राह से है...। काशी की इसी सांस्कृतिक दरियादिली पर हर धर्म और देश के लोग फिदा हैं। इस कड़ी में कुंडलिनी शक्ति जागृत करने की कला विदेशी मुस्लिम बालाएं सीख रही हैं।
धर्म, मजहब के परे मानसिक परेशानियों, व्याधियों से पार पाने और शांति की तलाश में सात समंदर पार से आईं ये बालाएं यहां मंत्र दीक्षा के साथ ही कुंडलिनी शक्ति जागृत करने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
वाग्योग चेतना पीठम् संस्थान में आचार्य वागीश शास्त्री के निर्देशन में दस दिवसीय उनका प्रशिक्षण चल रहा है। भारतीय संस्कृति, धर्म और तंत्र की शिक्षा लेने के उद्देश्य से विदेशी पर्यटक काशी का रुख करते हैं। इसी उद्देश्य से मोरक्को से योग प्रशिक्षक ओमानिया, फ्रांस की नसरीन और अजरबैजान की इल्हामा, ये तीन मुस्लिम बालाएं काशी पहुंची हैं।