वाराणसी। एक तरफ किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं बाजार न मिल पाने के कारण कई मशरूम उत्पादक किसान इससे किनारा करने लगे हैं। उनका कहना है उत्पादन तो अच्छा कर ले रहे हैं, लेकिन उत्पाद की अच्छी कीमत नहीं मिल रही है।
हाल ही में काशी विद्यापीठ ब्लाक के टीकरी गांव में औद्यानिक विपणन सहकारी समिति कम एफपीओ के माध्यम से मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण शिविर संचालित किया गया था। इसमें तीन सौ से अधिक किसानों को मशरूम उत्पादन के साथ अन्य जानकारी दी गई। लेकिन प्रशिक्षण के बाद भी किसान मशरूम का उत्पादन नहीं कर रहा। हालांकि एफपीओ और दवा कंपनी से करार कर वैकल्पिक बाजार तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
केस-1
कचंनपुर गांव के पंकज कुमार विश्वकर्मा बीएचयू से सूक्ष्म टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कर साल 2018 में ऑयस्टर मशरूम की खेती की थी। लेकिन उत्पाद का उचित बाजार न मिल पाने के कारण उत्पादन बंद कर दिया।
केस- 2
आराजीलाइन के सूर्यकांत कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर से प्रशिक्षण लेने के बाद ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया। इन्होंने इसके पाउडर, पापड़, अचार सहित कई उत्पाद बनाए, लेकिन बिक्री नहीं हो पाई और काम बंद करना पड़ा।
वर्जन
दवा कंपनियों में ऑयस्टर मशरूम के पाउडर की काफी मांग रहती है। कई दवा कंपनियों से करार की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा टीकरी में गांव में औद्यानिक विपणन सहकारी समिति कम एफपीओ के माध्यम से किसानों के उत्पादों को खरीद के लिए विकल्प तैयार किया जा रहा है। कई खाद्य कंपनियों और एफपीओ को इससे जोड़ने की तैयारी है, जहां किसानों के उत्पाद का सही दाम मिल सकेगा।
-संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी