अभियोजन पक्ष के अनुसार, गाजीपुर के खानपुर थाना क्षेत्र के करनपुर निवासी बलिराम राम ने चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। बलिराम के अनुसार उनकी बेटी किरनबाला की शादी वर्ष 1999 में डुढुवां (मीता का पुरा) निवासी राजेश कुमार के साथ हुई थी। राजेश जूनियर हाईस्कूल धौरहरा में अध्यापक था। किरनबाला जूनियर हाईस्कूल डुढुवां में सहायक अध्यापिका थी।
वर्ष 2004 में उनके दामाद राजेश का छोटे भाई मृत्युंजय घरेलू कलह के कारण आत्महत्या कर लिया था। इसी के बाद से उनकी पुत्री किरनबाला के साथ उसके पति, ससुर, सास और एक अन्य देवर रजनीश गालीगलौज करते थे।
23 अप्रैल 2011 को उनकी बेटी की सहेली साधना देवी ने उन्हें सूचना दी कि किरनबाला घर पर नहीं है। बेटी के कमरे में गए तो वहां दो स्थान पर अधिक मात्रा में खून जमीन पर गिरा दिखाई दिया और दो हंसिया भी मिली। दोनों हंसिया में खून लगा हुआ था। अपराह्न तीन बजे सूचना मिली कि ग्राम सरैया के पास गोमती नदी में एक औरत का शव पड़ा है।
शव को निकाला गया तो उसकी पहचान किरनबाला के रूप में हुई। कोर्ट में अभियोजन की ओर से अध्यापिका की आठ वर्षीय पुत्री का बयान ही आरोपियों के गले की फांस बना। कोर्ट ने दोनों पक्ष को सुनने और साक्ष्य के अवलोकन के बाद आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।