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जेल से हुकूमत न चला पाने पर कराई थी डिप्टी जेलर की हत्या

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वाराणसी। जिला जेल से अपराध जगत में अपनी हुकूमत न चला पाने और डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की सख्ती से आजिज आकर उनकी हत्या अपने गुर्गों से बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी ने कराई थी। प्रकरण को लेकर दो साल पहले एसटीएफ ने मुन्ना बजरंगी के शूटर अंबेडकरनगर के अमन सिंह, सुल्तानपुर के कुर्बान अली उर्फ सोनू, प्रतापगढ़ के सागर सिंह उर्फ शीबू और बलिया के रोहित सिंह उर्फ चंदन सिंह उर्फ चिंटू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रविवार की रात मिर्जापुर के पटेहरा से गिरफ्तार भदोही के रामसहायपुर का अमजद उर्फ पिंटू उर्फ डाक्टर उर्फ अंगद उर्फ हफीजुल्ला के खिलाफ मिर्जापुर के अहरौरा, कटरा कोतवाली व वाराणसी के कैंट थाने में हत्या सहित अन्य आरोपों में 17 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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एसटीएफ द्वारा 2017 में किए गए खुलासे के अनुसार जिला जेल में बंद रहने के दौरान डिप्टी जेलर की सख्ती से मुन्ना बजरंगी सहित अन्य बदमाश खासे परेशान रहते थे। मुन्ना बजरंगी ने एकाध बार डिप्टी जेलर को अर्दब में लेने की कोशिश भी की थी लेकिन उसका दांव उलटा पड़ गया था और जेल में उसकी पिटाई भी हुई थी। इसी वजह से उसने डिप्टी जेलर की हत्या की साजिश रची और उसके गुर्गों ने 23 नवंबर 2013 की सुबह महावीर मंदिर क्षेत्र में वारदात को अंजाम दिया था। डिप्टी जेलर की हत्या के बाद अमजद का नाम अहरौरा के जंगल में अगस्त 2014 में हुई गैंगवार से सुर्खियों में आया था। पुलिस के अनुसार गैंगवार में कल्लू पांडेय, सूरज सिंह और राजेश चौधरी की गोली मार कर अमजद ने हत्या कर दी थी।
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