मुहर्रम शुरू होते ही शिया जमात में मजलिस, मातम, नौहा और जुलूसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दरगाहे फातमान, सरैया इमामबाड़ा, चौहट्टा लाल खां, बजरडीहा, शिवाला, मुकीमगंज, रामनगर और दुल्हीपुर आदि इलाकों के इमामबाड़े सजाए जाएंगे। ताबूत और ताजिए स्थापित किए जाएंगे। शहर और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर कदीमी जुलूस और मजलिसें शुरू हो जाएंगी। वहीं, 8 मुहर्रम से इमाम चौकों पर ताजिए बैठाने का सिलसिला शुरू होगा। आशूरा के दिन इमाम हुसैन की याद में अकीदतमंद जुलूस निकालकर ताजियों को इमामबाड़ों में ठंड किया जाएगा। शहर के प्रसिद्ध ताजिए भी तैयार होने लगे हैं।
5 व 8 मुहर्रम को निभाई जाएगी उस्ताद की रवायत : मुहर्रम की 5वीं और 8वीं तारीख को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की रवायत निभाई जाएगी। उस्ताद इन दोनों दिनों के जुलूसों में शहनाई बजाते थे। उनकी इस परंपरा को उनके पोते और परिवार के अन्य सदस्य आगे बढ़ाते हुए जुलूस में शामिल होंगे और शहनाई पर उस्ताद के प्रसिद्ध नौहे पेश करेंगे।
40 घंटे और दुलदुल का उठेगा जुलूस
मुहर्रम के दौरान शहर में कई प्रमुख जुलूस निकाले जाएंगे। 1 से 10 मुहर्रम तक विभिन्न नामचीन जुलूस निकलेंगे। दालमंडी में तोड़फोड़ के बावजूद नाजिम जाफरी के आवास से जुलूस पुरानी रवायत के तहत ही उठाया जाएगा। मौलाना अमीन हैदर ने बताया कि उनके आवास पर जुलूस उठने का स्थान सुरक्षित है, इसलिए पहले की तरह ही जुलूस निकाला जाएगा। जबकि 40 घंटे का जुलूस औसानगंज से उठेगा। शिवपुर, कच्चीसराय और औसानगंज से दुलदुल का जुलूस, चौहट्टा लाल खां से मेहंदी का जुलूस तथा शिवाला से दूल्हे का जुलूस निकलेगा। 11 मुहर्रम को लुटे काफिले का जुलूस उठाया जाएगा।