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जिले की 100 मध्यम इकाइयों की सुधरेगी सेहत

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वाराणसी। एमएसएमई की नई परिभाषा से लघु इकाइयों को काफी फायदा होगा। यह मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों के लिए लाभदायक है। उद्यामियों के अनुसार, सूक्ष्म व माध्यम लघु उद्योग की बदली परिभाषा से जिले की 100 मध्यम इकाइयों का दायरा बढ़ जाएगा। साथ ही लगभग 2000 सूक्ष्म इकाइयों को भी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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उपायुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार के अनुसार, अब 200 करोड़ तक के टेंडर ग्लोबल न होकर एमएसएमई के लिए रिजर्व हो गए हैं। इससे बिजली आदि की समस्याएं भी सुलझ जाएंगी। सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत ऐसे उद्यम आएंगे, जिनमें एक करोड़ रुपये का निवेश और टर्नओवर 5 करोड़ तक होगा। यहां निवेश से मतलब मशीनरी वगैरह में निवेश है। उन उद्योगों को लघु उद्योग की श्रेणी में रखा जाएगा, जिनका मशीनरी आदि में निवेश 10 करोड़ और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक होगा। यह निवेश और टर्नओवर की सीमा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों उद्यमों पर लागू होगी। मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्यम जिनमें 50 करोड़ का निवेश और 250 करोड़ टर्नओवर है, वह मध्यम उद्योग में आएंगे। एक्सपोर्ट का टर्नओवर इसमें नहीं जोड़ा जाएगा।
--कोट--
सूक्ष्म उद्यम वह है जिसमें संयंत्र और मशीनरी में इन्वेस्टमेंट एक करोड़ से अधिक नहीं होता है और कारोबार पांच करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है। लघु उद्यम वह हैं, जिसमें संयंत्र और मशीनरी में 10 करोड़ से अधिक का इन्वेस्टमेंट नहीं होता है और उसका कारोबार 50 करोड़ से अधिक नहीं होता है। नई परिभाषा से निश्चित तौर पर उद्यामियों को लाभ मिलेगा। -नीरज भाटिया, महासचिव, एसआईए
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यह परिभाषा सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग दोनों के लिए लागू की गई है। इससे बहुत से छूटे हुए उद्योग भी इसमें समाहित हो जाएंगे। इससे काफी लाभ मिलेगा। यह सरकार का सराहनीय कदम है। -राजेश भाटिया, डिविजनल अध्यक्ष, आईआईए
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