धर्मेंद्र यादव ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार द्वारा जातीय जनगणना कराने के निर्णय का देशभर में स्वागत किया गया था और इससे पिछड़े वर्ग को सामाजिक न्याय मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन जनवरी 2026 में जारी गजट अधिसूचना का अध्ययन करने पर यह सामने आया कि उसमें पिछड़े वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार के सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक दस्तावेजों के बीच विरोधाभास नजर आता है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
सांसद ने वर्ष 2011 की जातीय जनगणना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी पिछड़े वर्ग को अपेक्षित न्याय नहीं मिल सका था। इसी कारण आज भी यह वर्ग आशंकित है और सरकार से स्पष्टता की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में सकारात्मक और पारदर्शी है, तो उसे तत्काल गजट अधिसूचना में संशोधन कर पिछड़े वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल करना चाहिए।