शर्मनाक बात तब सामने आई, जब भाई की माैत पर बहन घर झांकने तक नहीं आई। कह दिया कि उसके यहां भी गमी पड़ गई है। बेटी के इस जवाब पर मां अपने बेटे की लाश कमरे में रखकर निराश बैठी रही। मोहल्ल के रोहित चौरसिया ने इसकी सूचना समाजसेवी अमन कबीर को दी।
समाजसेवी अमन बुजुर्ग कुसुम के घर पहुंचे। अमन कबीर सेवा न्यास की मदद से राहुल चौरसिया की लाश को लेकर हरिश्चंद्र घाट पहुंचे। यहां हिन्दू रीति-रिवाज से राहुल के अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं। घर में किसी के न होने के कारण मां ने खुद अपने बेटे की चिता को अग्नि दी।
मजबूरियों के बीच मां ने वह जिम्मेदारी निभाई, जिसे निभाने की कल्पना मात्र से भी दिल कांप उठे। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं जब वृद्ध मां ने कांपते कदमों और डगमगाते हाथों से पुत्र की चिता को अग्नि दी।
अमन कबीर के अनुसार, मां ने मुखाग्नि देने से पहले बेटे के चेहरे को आखिरी बार स्पर्श किया, फिर भगवान से उसके मोक्ष की प्रार्थना की। उसके शरीर पर घी का लेपन भी किया। कुसुम के आंसू लगातार बह रहे थे। उसने बताया कि विवाह का सपना था, लेकिन सब चकनाचूर हो गया। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि काशी में अनेक विधि-विधान रोज होते हैं, लेकिन मां का ऐसा साहस और दर्द बहुत कम देखने को मिलता है।