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आस्था: 30 जिलों के किसानों की 50 क्विंटल धान की बालियों से सजीं मां अन्नपूर्णा, विश्वनाथ धाम में भी सजी झांकी

Thu, 27 Nov 2025 06:47 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

मां अन्नपूर्णा मंदिर में मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की पंचमी से शुरू 17 दिवसीय व्रत अनुष्ठान की पूर्णाहुति हुई। इस दौरान पूर्वांचल और बिहार के 30 जिलों के किसानों की ओर से अर्पित की गईं 50 क्विंटल धान की बालियों से मां का दरबार सजा। 
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मां अन्नपूर्णा के 17 दिवसीय महाव्रत का उद्यापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशीपुराधीश्वरी मां अन्नपूर्णा के 17 दिनों के व्रत का समापन मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी यानी बुधवार को हुआ। पूर्वांचल और बिहार के 30 जिलों के किसानों की ओर से अर्पित की गईं 50 क्विंटल धान की बालियों से मां का दरबार सजा। धान की बालियों से ही मां का शृंगार किया गया। भक्तों ने दर्शन कर मां से धन-धान्य की कामना की। श्रद्धालुओं को धान की बालियों का प्रसाद बृहस्पतिवार को वितरित होगा। उधर, विश्वनाथ मंदिर में स्थित मां अन्नपूर्णा का भी धान की बालियों से शृंगार हुआ।
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मां अन्नपूर्णा मंदिर में मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की पंचमी से शुरू 17 दिवसीय व्रत अनुष्ठान की पूर्णाहुति हुई। मंदिर के महंत शंकरपुरी महाराज के आचार्यत्व में किसानों की ओर से लाई गई फसल की पहली धान की बालियों से मां अन्नपूर्णा सहित अन्य विग्रहों का शृंगार हुआ। विविध नैवेद्य अर्पित पूजन हुआ। महंत ने मां की आरती उतारी।

किसान धान की बालियां मां के श्रीचरण में अर्पित कर मां से धन-धान्य की कामना की। इस कठिन व्रत को 17 दिनों से रख रहे व्रती 17 गांठ और 17 धागे धारण कर मां की पूजा की। महंत शंकर पुरी ने बताया कि मार्गशीर्ष मास के इस व्रत को करने और पूजन से अन्न‑धन की समृद्धि बनी रहती है। भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम में 17 दिनों तक चलने वाले व्रत-अनुष्ठान के सफल समापन पर परिसर स्थित मां अन्नपूर्णा का धान की बालियों से शृंगार कर विशेष पूजन हुआ। भक्तों ने मां अन्नपूर्णा का दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर को धान की बालियों से सजावट की गई थी।
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