प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने सावन के तीसरे सोमवार को बाबा काशी विश्वनाथ और उनके स्वरूप काशीवासियों को रामकथा के रसधार से अभिसिक्त कर दिया। विश्वनाथ धाम में गंगा के समानान्तर प्रवाहित मानस कथा में श्रद्धालुओं ने गोते लगाते हुए रोम-रोम को तर किया। उन्होंने भगवान शिव का निवास के लिए काशी को चुनना सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया।