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Ramadan: नजर आया रमजान का चांद..., मस्जिदों में हुई तरावीह की नमाज; शुरू हो गया इबादतों का महीना

Sun, 02 Mar 2025 02:37 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रमजान का पहला रोजा रविवार से शुरू होगा। इसके एक दिन पहले यानी शनिवार शाम चांद दिखते ही तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं, अहले सुन्नत हजरात ने शहर की मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की।
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मंडुवाडीह स्थित मस्जिद में तरावीह की नमाज के दाैरान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ramadan 2025: रमजान उल मुबारक के चांद की तस्दीक होते ही बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हुई तो दूसरी ओर शिया समुदाय ने मजलिस और दुआख्वानी से इस्तेकबाल किया। चांद नजर आने के बाद बाजार में भी रौनक बढ़ गई। माह ए रमजान में रोजे की अवधि रोजाना 13:15 मिनट की रहेगी।

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शनिवार को 30 शाबान की शाम रमजान उल मुबारक के चांद का दीदार हुआ। चांद का दीदार होते ही मुसलमान भाइयों ने एक दूसरे को मुबारकबाद देने के साथ ही इबादत का भी आगाज किया। 
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शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि अहले सुन्नत हजरात ने शहर की मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की। खुदा की बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए और सजदे में सिर झुकाया। 

शिया समुदाय ने अपने शहर की 32 मस्जिदों में इमाम बारगाह, दरगाहों में मजलिस और दुआख्वानी के साथ रमजान उल मुबारक का इस्तेकबाल किया। लोगों ने सेहरी और इफ्तार के लिए खरीदारी की। मुस्लिम बहुल इलाकों में देर रात तक चहल पहल रही। फरमान हैदर ने बताया कि रमजान एक ऐसा महीना है जिसमें हर मुसलमान अपने रब की ज्यादा से ज्यादा इबादत करता है। 

गरीबों और यतीमों की भरसक मदद करता है। मस्जिदें रोजादारो से गुलजार हो उठी। खुशगवार मौसम में रोजे का आगाज हो रहा है। इस बार रोजा तकरीबन 13.15 घंटे का होगा। शिया समुदाय इस माह की 15 तारीख को इमाम हसन की विलादत की खुशी और 21 रमजान को मौला अली की शहादत का गम भी मनाया जाएगा।

मंडुवाडीह स्थित मस्जिद में तरावीह की नमाज के दाैरान। - फोटो : अमर उजाला
मांगी दुआएं, छोड़े पटाखे
दालमंडी में मुस्लिम लोगों ने रमजान शरीफ का चांद देखकर 30 रोजा रखने की दुआएं मांगी। पटाखा छोड़कर खुशियां मनाईं। डर्बी शायर क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि इस्लाम का सबसे पवित्र महीना रमजान है। पैगंबर मोहम्मद साहब को कुरान की पहली आयत इसी महीने में मिली थी। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा दान दिया जाता है और ज्यादा से ज्यादा कुरान पढ़ी जाती है। इस महीने में सभी तरह की बुराई से दूर रहते हैं।

फज्र की नमाज के बाद रखा जाएगा पहला रोजा
रविवार को सुबह पांच बजे फज्र की नमाज के बाद पहला रोजा रखा जाएगा। इस्लाम में ऐसी मान्यता है कि रमजान में रोजेदारों को गरीबों की मदद करनी चाहिए। अपनी कमाई का ढाई प्रतिशत जकात के रूप में ईद से पहले गरीबों को देना चाहिए।

इससे गरीब लोग भी ईद पर नए कपड़े खरीद सकेंगे। रोजे के दौरान क्रोध से बचें और झूठ न बोलें। इस पवित्र महीने में नेक काम करने पर 70 गुना सवाब मिलता है, वहीं गलत काम करने पर 70 गुना गुनाह भी लगता है। सहरी खाना सुन्नत है।
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सुन्नी - इफ्तार 5:59 बजे, सहरी 5:04 बजे
शिया - इफ्तार 6:11 बजे, सहरी 4:59
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