वाराणसी। शनिवार को सूर्यास्त के बाद जैसे ही चांद दिखा, वैसे ही शहादत ए हुसैन का 1381वें साल का आगाज हो गया। घर-घर में इस्तकबाल ए अजा की मजलिसें हुईं। शहर की 31 शिया अंजुमनों ने अपने-अपने क्षेत्र में मजलिसों के जरिये कर्बला के शहीदों को खेराज ए अकीदत पेश किया। शिवपुर, अंर्दली बाजार, नक्खी घाट, लाट सरैया, दोषीपुरा कच्चीबाग, बड़ी बाजार, चौहट्टी लाल खां, मुकीमगंज, राजापुरा, राम नगर, दुलहीपुर, पड़ाव, शिवाला, गौरीगंज, बजरडीहा मदनपुरा, भेलूपुरा, कश्मीरी गंज, चौक, दालमंडी, नई सड़क, काली महल, पितरकुंडा, मातृकुंड, नई पोखरी, दरगाहे फातमान, सदर इमामबाड़ा पर मजलिसों का आयोजन किया गया। रविवार को अलम दुलदुल का पहला जुलुस, सदर इमामबाड़े में दो बजे दिन में उठेगा। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता, हाजी सैय्यद फरमान हैदर कर्बलायी ने बताया कि मेरी खुशियों का सफर गम से शुरू होता है, मेरा हर साल मोहर्रम से शुरू होता है। एक सितंबर को दो बजे दिन में अलम दुलदुल का पहला जुलूस उठाया जाएगा। शहर की कई अंजुमनें, नौहा मातम करेंगी। यह जुलूस सदर इमामबाड़ा के कैंपस में ही उठाया जाएगा, वहीं इमाम हुसैन के रौजे पर जाकर समाप्त होगा।