अंधेरे में निकला जूलूस :
चौहट्टा लाल खां में मिर्जा मेहंदी के इमामबाड़े से ताबूत का जुलूस उठा जो इमामबाड़ा मीर घूरा आकर खत्म हुआ। चौहट्टा लाल खां से ही एक दूसरा खास जुलूस उठा। इस जुलूस की खासियत यह रही कि पूरा जुलूस अंधेरे में निकाला गया। इस दौरान शामिल रिजवी, वजीर हसन, दानिश हसन और गुलाम अब्बास ने नौहाख्वानी की। अर्दली बाजार में जियारत हुसैन के निवास से शाहिद हुसैन के संयोजन में जुलूस उठाया गया। अंजुमन इमामिया अर्दली बाजार दर्द भरे नौहे पेश कर रही थी। शिवाले में डिप्टी जाफर बख्त के इमामबाड़े से और बाराती बेगम के इमामबाड़े से अलम, दुलदुल और ताबूत के जुलूस नौहा मातम के साथ उठाए गए।
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जुलूस के आगे चलते थे भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां :
चाहमामा से निकलने वाले जुलूस के संयोजन मुनाजिर हुसैन मंजू ने बताया कि जुलूस में जब तक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सेहतयाब रहे उन्होंने शहनाई बजाई। वो जुलूस के आगे आगे शहनाई पर मातमी धुन बजाते थे और फि र फातमान में जहां आज उनका मकबरा है वहां बैठकर चांदी की शहनाई पर मातमी धुन पेश किया करते थे। अंजुमन हैदरी के नौहाखां शराफ त अली खां ने बताया कि उस्ताद इस जुलूस में नंगे पांव शिरकत करते थे। शराफ त अली खां ने बताया कि उस्ताद की शहनाई पर जब इमाम हुसैन के 6 माह की बेटे की याद में लिखा गया नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का... की धुन सुनाई देती थी तो लोग रोने लगते थे।