वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय दफ्तर पर मंगलवार को अपराह्न कांग्रेसजनों ने खूब हंगामा किया। लंका से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता रवींद्रपुरी स्थित पीएम के संसदीय दफ्तर पहुंचे। धरना दिया, भाषण किया और ज्ञापन सौंपकर लौट गए। आंदोलन की कमान भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और किसान मजदूर कांग्रेस के हाथों में रही। हालांकि इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों का जुटान हुआ। धरना-प्रदर्शन की पूर्व सूचना होने की वजह से कार्यालय के आसपास पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त थे। कई थानों की फ ोर्स और पीएसी की एक कंपनी पहले से ही तैनात थी।
राछास नेताओं ने बीएचयू में छात्रसंघ, अध्यापक संघ और कर्मचारी संघ की बहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की। पीएम को संबोधित पत्र में लिखा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला है। लोकतंत्र की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार को तत्काल बीएचयू में छात्रसंघ की बहाली का रास्ता साफ कर जल्द से जल्द चुनाव कराना चाहिए। छात्रों ने व्यापमं घोटाले में
फंसे मप्र के सीएम शिवराज सिंह चौहान, ललित मोदी कांड से विवादों में आई राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया और भ्रष्टाचार के आरोप में फंसी पंकजा मुंडे की तत्काल उनके पद से बर्खास्तगी की मांग भी की। राछास नेताओं ने फर्जी डिग्री मामले में एमएचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी को भी हटाने की पीएम से मांग की। उधर, किसान खेत मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक विनय शंकर राय मुन्ना के नेतृत्व में किसानों ने हंसुआ-खुरपी लेकर पीएम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। पीएम को संबोधित ज्ञापन
में किसान हित में मौजूदा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश तत्काल वापस लेने और मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर के पीडि़त किसानों को बकाया मुआवजे का भुगतान करने की मांग की। साथ ही पीएम के स्वागत पर हो रहे करोड़ों रुपये खर्च पर सवाल उठाते हुए उसे फिजूलखर्ची बताया और कहा कि इस पैसे से यदि छोटे कल-कारखाने सरकार लगवा देती तो शहर के हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता।