लोहता। बनारस जिले के आठों ब्लाकों में खेती के मिट्टी की सेहत काफी खराब हो रही है। किसान अधिक फसल लेने के लिए अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। जिसके कारण जमीन के अंदर से कई पोषक तत्व नष्ट हो गए हैं। समय रहते किसान नहीं चेते तो जमीन बंजर हो जाएगी।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए किसानों हरी खाद और जैविक खाद का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बची रहे और मिट्टी की सेहत अच्छी रहे ताकि फसलें अच्छी और स्वस्थ रहें। जिले के आठों ब्लाकों के मिट्टी की जांच में सामने आया कि पोषक तत्वों की कमी इतनी ज्यादा हो गई है कि फसलों की पैदावार कम हो गई है।
सेवापुरी, काशी विद्यापीठ, आराजी लाइन और चोलापुर ब्लाक में जीवांश कार्बन की मात्रा बहुत कम हो गई है। यहां जीवांश कार्बन .50 फीसदी होना चाहिए जबकि वर्तमान में इन दोनों ब्लाक में .20 फीसदी है। बड़ागांव और हरहुआ में फास्फोरस की मात्रा कम हो गई है। यहां 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की बजाय 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर ही बची है। पिंडरा और चिरईगांव में पोटाश की 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जगह 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ही है। मिट्टी में सल्फर 15 पीपीएम की जगह 10 पीपीएम, जिंक 12 पीपीएम की जगह 0.6 पीपीएम, लोहा 8 पीपीएम की जगह 4 पीपीएम, कापर 0.4 पीपीएम की जगह 0.2 पीपीएम, मैगनीज 4 पीपीएम की जगह दो पीपीएम पर पहुंच गया है।
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पोषक तत्वों की कमी से हो रहा नुकसान
जमीन में पोषक तत्वों की कमी के कारण फसलों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिंक की कमी से धान का उत्पादन कम होने और खैरा रोग लगने का खतरा है। नाइट्रोजन की कमी से पौधों का बढ़ाव, फास्फोरस की कमी से जड़ों का विकास रुक जाता है। पोटाश की कमी से दानों की चमक खत्म होती है और लोहा की कमी से पत्तियों में सफेद धारियां लग जाती है। सल्फर से पत्तियां पीली और मैगनीज की कमी से फली फट जाती है।
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मिट्टी से पोषक तत्वों का कम होना चिंता का विषय है। इन पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने और रासायनिक खादों का प्रयोग बंद करके जैविक और हरी खाद का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें। जिससे मिट्टी की सेहत अच्छी रहे और पैदावार भी अच्छा हो।
-राजेंद्र प्रसाद सहायक निदेशक मृदा परिक्षण।