देश में आए दिन खोने वाले बच्चों की जल्दी खोजना और उन्हें अपने माता-पिता तक पहुंचाना अगले साल से पुलिस के लिए आसान हो जाएगा। इसके लिए आईआईटियन रहे मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी एक मोबाइल एप बनबा रहे हैं। फिलहाल, जिला स्तर पर एप का परीक्षण कर खामियों को दुरुस्त किया जा रहा है।
एप के बारे में गृह मंत्रालय और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया जाएगा। दोनों मंत्रालय की हरी झंडी मिलने पर 2018 की शुरुआत में एप देशभर में प्रभावी हो सकता है।
पूर्वांचल में वाराणसी और इसके आसपास के नौ जिलों में रोजाना पुलिस के पास 13 से 15 बच्चे खोने की शिकायत आती है। हालांकि इनमें से कुछ जल्द ही परिवारवालों को मिल जाते हैं, मगर ज्यादातर को तमाम भागदौड़ के बावजूद निराशा हाथ लगती है।
बनाए जा रहे एप से देश भर के थानों और प्रत्येक जिले की चाइल्ड लाइन जोड़ी जाएगी। एप में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिसके सहारे किसी एक चेहरे से मिलते-जुलते 10 चेहरे आसानी से अलग किया जा सकेंगे। इसके बाद उन 10 चेहरों में कौन 100 प्रतिशत सही है, उसकी तस्दीक की जा सकेगी।
मान लीजिए अगर कोई बच्चा मिर्जापुर से खो जाता है तो उसकी फोटो संबंधित क्षेत्र का थानेदार एप में अपलोड कर देगा। वह बच्चा कोलकाता के किसी थाना क्षेत्र में पुलिस को मिल गया है तो वहां का थानेदार उसकी फोटो एप में अपलोड कर देगा। एप दोनों फोटो की मैचिंग कर बता देगा कि मिर्जापुर से खोया बच्चा कोलकाता में है या नहीं।
खोने वाले बच्चों के साथ ही घर-परिवार से किसी कारण से बिछुड़ने वाले बच्चों और बुजुर्गों की फोटो भी इसी एप में अपलोड कर उन्हें भी अपने-अपने घर पहुंचाया जाएगा।
मिर्जापुर एसपी आशीष तिवारी ने बताया कि गुजरात और वाराणसी के युवा तकनीकी जानकार स्टार्टअप के तहत ये काम कर रहे हैं। एप के मूर्त रूप लेने पर पुलिस की कार्यप्रणाली में तेजी और बदलाव नजर आएगा।