मिर्जापुर जिले के आदर्श नगर पंचायत कछवां से राजातालाब मार्ग पर करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक प्राचीन शिव मंदिर सारनाथ का अपने आप में एक विशेष महत्व है। सावन मास के चारों सोमवार को मंदिर के आसपास मेला लगता है। लोग दर्शन-पूजन कर मेले का आनंद उठाते हैं। कांवरिए गंगाजल लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
इस मंदिर का निर्माण कब हुआ और किसने कराया यह ज्ञात नहीं है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार उन्होंने भी अपने दादा-परदादा से इस मंदिर के बारे में सुना है। इसी से अनुमान लगाया जाता है कि यह मंदिर तकरीबन दो हजार वर्ष पुराना है। जनश्रुति के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव के गणों ने किया था।
मंदिर की मान्यता :
जमीन से आठ फीटे नीचे से शुरू हुए इस मंदिर की ऊंचाई जमीन के बाहर तीस फीट की है। आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों को एक के उपर एक रख कर बनाया गया है। मंदिर के पत्थर पर उकेर कर किसी भाषा मे कुछ लिखा है। इसे आज तक कोई भी पढ़ नहीं सका।