आईआईटी बीएचयू के धातुकर्म अभियांत्रिकी (मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग) विभाग ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। विभाग अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। इस कड़ी में 26 अक्तूबर यानी बृहस्पतिवार से 28 अक्तूबर तक स्वतंत्रता भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम होंगे। इसमें देश-विदेश से पुरातन छात्र जुटेंगे। वर्ष 1982 के पुरातन छात्र व एजिलिसिस इंक. के सीईओ रमेश श्रीनिवासन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। बुधवार को शताब्दी वर्ष का लोगो भी जारी कर दिया गया।
मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना साल 1923 में भारत में सबसे पहले काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ही हुई थी। इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना के बाद देश में पहली बार धातु विज्ञान में स्नातक और डॉक्टरेट की डिग्री क्रमशः 1927 और 1955 में इसी विभाग की ओर से प्रदान की गई। आयोजन समिति के संयोजक और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गिरिजा शंकर महोबिया के मुताबिक 1960 में विभाग में प्रोफेसर बेशफोर्थ की ओर से एक छोटा एलडी कनवर्टर स्थापित किया गया जो उस समय की स्टील बनाने की सबसे आधुनिक तकनीकी थी।
2930 स्नातक, 707 स्नातकोत्तर, 205 को मिली पीएचडी की उपाधि
धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग ने अब तक 2930 स्नातक, 707 स्नातकोत्तर (एमटेक दोहरी डिग्री सहित) और 205 पीएचडी डिग्री प्रदान की है। विभागाध्यक्ष और आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. सुनील मोहन ने बताया कि देश के जाने माने धातु विज्ञानी, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ तीन दिवसीय इस समारोह में अपने अनुभवों को साझा करेंगे। इस दौरान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध सम्मेलन, पूर्व छात्र समागम और वर्तमान छात्रों के बीच प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। समारोह में जाने माने धातु विज्ञानी गिनीज रिकाॅर्डधारक डॉ. पुलिकेल अजयन, यूएसए के पेंसिलवालिया विश्वविद्यालय के डॉ. दीप जरीवाला बतौर वक्ता मौजूद रहेंगे। इनके अलावा प्रधानमंत्री के पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. सी सूर्यनारायण भी शिरकत करेंगे।