पांच बाजार पांच रिपोर्टर, समय 12 बजे
छूट से बाजारों में लगी कतार, सामाजिक दूरी तार-तार
बाजारों अधिकांश दुकानें से खुलने से दो बजे तक आ रहे खरीदार, कोरोना से बचने के उपाय दरकिनार
वाराणसी । लॉकडाउन के बीच मिली छूट का असर बाजारों में दिखने लगा है। बाजार में अधिकांश दुकानें खुलने से रौनक लौट रही है। दो बजे तक ही खरीदार दुकानों पर आते हैं। शुक्रवार को आवश्यक वस्तुओं की दुकानों के साथ बाजारों में हार्डवेयर, सेनेटरी, ग्लास वेयर, पेंट, टाइल्स, बिल्डिंग मटीरियल, वेल्डिंग, जनरल स्टोर, इलेक्ट्रिकल्स व इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, मोबाइल, किताब-कॉपी, शराब-बीयर आदि की दुकानें खुली। जिन पर सुबह सात से दोपहर दो बजे तक ग्राहक उमड़े रहे। कई जगहों पर दुकानदार और ग्राहक सामाजिक दूरी का पालन करते दिखे तो कई जगह पर सोशल डिस्टेंसिंग तार तार रही। यही हाल रहा तो कोरोना के संक्रमण बढ़ने का भी खतरा बना रहेगा।
स्थान चेतगंज : किराना और जनरल स्टोर्स पर उमड़े ग्राहक
किराना और जनरल स्टोर्स की दुकानों पर काफी भीड़ रही। चेतगंज में कुछ घड़ी मरम्मत की भी दुकानें खुली रहीं। इनके अलावा फोटो फ्रेम और जूता पॉलिश के अलावा मसाला की दुकानों पर भीड़ रही। दुकानदार विनोद गुप्ता ने बताया कि कंपनियां अब क्रेडिट में नहीं बल्कि नकद लेकर माल दे रही हैं। माल भी ऐसे मिल रहा है कि 10 पैकेट बिस्किट मंगवाओ तो तीन पैकेट ही आता है। व्यवसाय में काफी नुकसान हुआ है। इस बीच पुलिस भी आए दिन चालान कर परेशान कर रही है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या, कैसे होगा। क्षेत्र में लोग बेफिक्री के साथ आते-जाते दिखे। किराना की कई दुकानों पर सैनिटाइजर रखा था और ग्राहकों को से आग्रह किया जा रहा था थोड़ी दूरी बनाकर रखें। इसके उलट कुछ दुकानों पर भीड़ जुटी रही। जो सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान नहीं रख रहे थे।
स्थान मंडुवाडीह : दुकानें खुलीं, चौराहे पर जाम जैसे हालात
सामान्य दिनों की तरह ही मंडुआडीह बाजार में भीड़ भाड़ दिखी। थाने के आगे से लेकर चौराहे तक सुराही की दुकानों से लेकर किराना और जनरल मर्चेंट की दुकानों पर खरीदारी करते लोग जहां नजर आए। वहीं सबसे ज्यादा भीड़ मंडुवाडीह चौराहे पर दिखी। बाइक पर दो सवारी के साथ ही चार पहिया गाड़ियां भी दौड़ती नजर आई। इस वजह से चौराहे पर जाम जैसी स्थिति भी रही। लिहाजा लोग सामान्य दिनों की तरह जैसे ट्रैफिक सिग्नल रेड होने पर रुकते है वैसे ही रुक गए। कुछ पुलिस कर्मी लोगों को सुरक्षित आने जाने की सलाह देते रहे। इसके अलावा चौराहे से मंडुआडीह आरओबी की ओर जाने वाली सड़क के दोनों तरफ के साथ ही पुल के नीचे मेडिकल और घरेलू सामान के दुकानों पर भी खरीदारी लोग करते रहे। अब्दुल फिरोज और विनायक श्रीवास्तव ने बताया कि दो बजे के पहले ही सारा सामान खरीदना पड़ता है।
स्थान विशेश्वरगंज मंडी : दो गज की दूरी की अपील बेअसर
पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी विशेश्वरगंज में लॉकडाउन में बदली-बदली नजर आ रही है। कोरोना महामारी के डर से लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो इसको भूले दिखे। दोपहर 12 बजे विशेश्वरगंज गल्ला मंडी के बाहर तो दुकानों पर इक्का-दुक्का ग्राहक थे, लेकिन अंदर कई दुकानों पर जमावड़ा लगा हुआ था। दुकानदार भी लोगों से अपील कर रहे थे कि दूरी बनाकर रहें, लेकिन कुछ लोग तो उनकी बातों को हल्के में ही ले रहे थे। आढ़तिया महेश ने बताया कि अपनी सुरक्षा अपने ही हाथ में है। वहीं दलहन मंडी में विकास का कहना था कि लोग जब बाजार आ रहे हैं तो वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ही भूल जा रहे हैं। दो गज की दूरी तो छोड़ दीजिए एक हाथ की दूरी भी मुश्किल हो जा रही है। फल मंडी का भी कुछ ऐसा ही हाल है।
स्थान लंका : मोबाइल, बाइक की मरम्मत कराने की बेताबी
लंका इलाके में धूप में लोग सड़कों पर आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए निकले। ज्यादातर भीड़ मेडिकल और किराना की दुकानों पर रही। प्रफुल्ल नगर कालोनी मोड़ और रविदासगेट के पास नया यह देखने को मिला कि अंडे के ठेले पर गोलगप्पा और मास्क भी बिक रहा। वहीं शुक्रवार के चलते इलेक्ट्रिक उपकरण और अन्य मोबाइल मरम्मत की दुकानों खुली थीं। इन दुकानों पर उतनी भीड़ नहीं नजर आईं। बेकरी दुकान संचालक मनीष ने बताया कि 7 से 2 बजे के नियम में ग्राहकों और दुकानदारों को काफी परेशानी हो रही है। पूर्व 10 से 5 का नियम सबसे अच्छा था। कुछ ही दूर आगे लंका-दुर्गाकुंड मार्ग की तरफ बढ़ने पर महेश चौहान की बाइक मरम्मत की दुकान खुली हुई थी, लेकिन महेश को सांस लेने की फुर्सत नहीं थी, कारण कि एक साथ 5 से 7 बाइक की सर्विसिंग 2 बजे के अंदर में ही करनी थी। ठेले पर सब्जी-फल की बिक्री जोरों पर रही।
स्थान पांडेयपुर : खाझा बताशा, लाई चूरा का बिक्री धड़ाम, कैसे होगा गुजारा
तीखी धूप के बीच पांडेयपुर चौराहे पर पुतुल सोनकर कभी अपने ठेले के नारियल पानी को देख रही थीं तो कभी सड़क की ओर। उनको परेशान देख जब उनकी समस्या पूछी गई तो उन्होंने कहा कि भइया सुबह आठ बजे से खड़े हैं। 12 बज गए हैं, अब तक सिर्फ दो डाभ (नारियल पानी) 60 रुपये के बिके हैं। पति रहे नहीं, पांच बच्चों का सहारा मैं ही हूं। कैसे गुजर-बसर होगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति कोई खास सतर्कता दुकानदार और ग्राहक दोनों में नहीं दिखी। किराना की दुकानों पर तो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे कोरोना वायरस के संक्रमण नाम की कोई चीज ही नहीं है। दुकानदार अशोक गुप्ता ने कहा कि लॉकडाउन में 35 से 40 प्रतिशत ग्राहक कम हुए हैं। लाई, चूरा और बताशा दुकानदार पवन गुप्ता ने कहा कि हमारा धंधा चौपट हो गया है। लगन के समय खाझा-बताशा आदि की जमकर बिक्री होती थी, लेकिन सब कुछ ठप सा पड़ गया है।