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Famous Shiva Temple: यूपी के इस शिव मंदिर में यमराज भी हुए थे पराजित, बेलपत्र चढ़ाने से पूरी होती है मुराद

Tue, 05 Aug 2025 12:31 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Varanasi News: काशी मंदिरों और परंपराओं का शहर है। यहां सावन में शिवालयों में भक्तों का रेला पूरे महीने लगा रहता है। ऐसा ही मंदिर मार्कंडेय महादेव का है। यहां श्रीराम लिखा बेलपत्र और एक लोटा जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मार्कंडेय महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में सावन के महीने में भक्तों का तांता लगा हुआ है। यह मंदिर वाराणसी गाजीपुर राजमार्ग पर कैथी गांव के पास स्थित है। इस मंदिर का इतिहास अद्भुत है। मार्कंडेय महादेव मंदिर पूर्वांचल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। 

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पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लाखों भक्त जलाभिषेक करने के लिए मार्कंडेय महादेव मंदिर में आते हैं। सावन माह में यहां एक माह का मेला लगता है। मार्कंडेय महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में से एक है। विभिन्न प्रकार की परेशानियों से ग्रसित लोग अपने दुःखों को दूर करने के लिए यहां आते हैं। मंदिर के बारे में और कई कहानियां प्रचलन में है। 

मार्कंडेय महादेव मंदिर के बारे में एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब मार्कंडेय ऋषि पैदा हुए थे तो उन्हें आयु दोष था। उनके पिता ऋषि मृकण्ड को ज्योतिषियों ने बताया कि बालक की आयु मात्र 12 वर्ष है। यह सुन माता-पिता सदमे में आ गए। ज्ञानी ब्राह्मणों की सलाह पर बालक मार्कंडेय के माता-पिता ने गंगा गोमती संगम तट पर बालू से शिव विग्रह बनाकर शिव की अर्चना करने लगे।
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भगवान शंकर की घोर उपासना में लीन हो गए। बालक मार्कंडेय के जैसे ही 12 वर्ष पूरे हुए तो यमराज उन्हें लेने आ गए। बालक मार्कंडेय भी उस वक्त भगवान शिव की अराधना में लीन थे। उनके प्राण हरने के लिए जैसे ही यमराज आगे बढ़े तभी भगवान शिव प्रकट हो गए।  

भगवान शिव के साक्षात प्रकट होते ही यमराज को अपने पांव वापस लेने पड़े। उन्होंने कहा कि मेरा भक्त सदैव अमर रहेगा, मुझसे पहले उसकी पूजा की जाएगी। तभी से उस जगह पर मार्कंडेय जी व महादेव जी की पूजा की जाने लगी। तभी से यह स्थल मार्कंडेय महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 

शंकर भगवान के मंदिर में ही दिवार में मार्कंडेय महादेव की पूजा होने लगी। लोगों का ऐसा मानना है कि सावन मास और महाशिवरात्रि में यहां राम नाम लिखा बेलपत्र व एक लोटा जल चढ़ाने से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। 

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