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Varanasi News: काशी में भी बनेगा मराठी समाज का भवन, महाराष्ट्र सरकार करेगी सहयोग

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महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि काशी में भी मराठी समाज के लिए भवन का निर्माण होगा। इसमें महाराष्ट्र सरकार हरसंभव मदद करेगी। महाराष्ट्र के बाहर मराठी भाषा और संस्कृति को सुरक्षित रखना और संवर्धन करना सराहनीय है। मराठों का इतिहास गौरवशाली एवं वीरता से भरा हुआ है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी की शूरवीरता का उल्लेख करना इसका जीता जागता उदाहरण है।
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वह शनिवार को श्री काशी महाराष्ट्र सेवा समिति की ओर से आयोजित बृहन्महाराष्ट्र मंडल के 72वें अधिवेशन के दूसरे दिन महमूरगंज स्थित शृंगेरी शंकराचार्य मठ में देश भर से आए प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। केसरकर ने कहा कि आज महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार है और हमारी सरकार मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मराठी साहित्य सम्मेलन हो या मराठी भाषा विभाग द्वारा आयोजित परीक्षा हो, महाराष्ट्र सरकार उसके लिए आर्थिक रूप से सहयोग करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। पिछले साल से मुंबई में विश्व मराठी सम्मेलन की शुरुआत हुई जिसमें विश्व भर से आने वाले मराठी भाषी लोगों को अपनी बात कहने का एक प्लेटफार्म मिला। महाराष्ट्र के बाहर बहुत सारी मराठी भाषी संस्थाए हैं जिन्होंने मराठी भाषा एवं संस्कृति को जीवित रखा है। ऐसी मराठी भाषी संस्थाओं के संवर्धन के लिए महाराष्ट्र सरकार तत्परता से कार्य कर रही है। महाराष्ट्र के बाहर मराठी समाज का भवन बने इसके लिए महाराष्ट्र सरकार हर वर्ष अनुदान को राशि देती है। उन्होंने मराठी भाषा विभाग की और से बृहन्महाराष्ट्र मंडल को 25 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। कहा कि काशी में भी मराठी समाज के भवन के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।
काशी के मराठी भाषी विद्वानों का हुआ सम्मान
अधिवेशन के दौरान शनिवार की सुबह निवर्तमान जिला जज न्यायमूर्ति अजय कृष्ण विश्वेश की अध्यक्षता में विद्वत सत्कार समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि मेयर अशोक तिवारी रहे। इस दौरान पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़, पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित, पंडितराज जगन्नाथ शास्त्री तैलंग, पं. जयराम जोशी, प्रो. राजाराम शुक्ल, योगेश सप्तर्षि, विश्वनाथ मुनि, दीपिका रंगप्पा को सम्मानित किया गया।
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मराठी समाज ने संजोकर रखी है संस्कृति
दोपहर में परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि काशी में सैकड़ों साल से रहने वाले मराठी समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति को संजोकर रखा है। काशी के घाटों तथा मंदिरों का निर्माण महाराष्ट्रीयन लोगों ने कराया है। प्रो. प्रदीप डोंगरे ने काशी में रहने वाले विभिन्न महाराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के विषय में प्रकाश डाला तथा श्री संजय गोरे में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पर चर्चा की। चर्चा में श्री पांडुरंग पुराणिक, विजय कृष्ण भागवत, प्रो. प्रदीप डोंगरे, संजय गोरे तथा पंडित विनोद राव पाठक ने भाग लिया।

राम नाम रस भीनी चदरिया झीनी रे झीनी...
अधिवेशन के दौरान शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुति में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त महेश काले ने अपनी गायकी से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। शास्त्रीय गायक महेश काले ने मराठी भक्तिगीत, भावगीत, अभंग एवं नाट्य संगीत की प्रस्तुति दी। उन्होंने शुरुआत शिव आज, मन करत राम नाम सुदीन... से की। तबले पर प्रसाद पाध्ये, संवादिनी पर अभिनय रवंदे, पखावज पर मनोज भांडवलकर, बांसुरी पर हर्षित शंकर, तालवाद्य पर सूर्यकांत सुर्वे, तानपुरा पर रमेश सरना एवं रुपम बसाक ने संगत की।
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