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अलविदा 2018 : बनारस में स्वास्थ्य सुविधाएं तो बढ़ीं, लेकिन मुसीबतों ने नहीं छोड़ा साथ

Tue, 25 Dec 2018 10:38 AM IST
shashikant misra न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर इस साल मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से सुविधाओं में इजाफा तो हुआ लेकिन मुसीबतों ने भी लोगों का साथ नहीं छोड़ा। एक ओर जहां आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधा देने की पहल शुरू हुई।
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कैंसर संस्थान, सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के निर्माण में तेजी आई तो दूसरी ओर बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से छह दिन तक ओपीडी, इमरजेंसी सेवा बाधित रही।

इसके अलावा नवंबर के दूसरे सप्ताह से ही बीएचयू अस्पताल में एमआरआई जांच भी एक महीने तक ठप रही। मरम्मत के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी जब-तब मशीन खराब हो जा रही है। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने से कई बार अल्ट्रासाउंड जांच को भी ठप करना पड़ा।
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मंडलीय अस्पताल में तो दवाओं की कमी की वजह से लोगों को बाहर से दवा खरीदकर इलाज कराना पड़ा। बीएचयू से लेकर सरकारी अस्पतालों में मारपीट की घटनाएं भी खूब हुई, जिससे आए दिन कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ा।

कैंसर संस्थान निर्माण में तेजी, मिलेगी राहत

बीएचयू में बन रहे महामना मालवीय कैंसर संस्थान का निर्माण भी इसी साल मार्च में शुरू हुआ। छह मंजिला बन रहे इस संस्थान में मरीजों के जांच, इलाज की सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका उद्घाटन इसी महीने कराने की तैयारी चल रही है।

इसके बाद कैंसर मरीजों को भागदौड़ से छुटकारा मिल जाएगा। उधर लहरतारा स्थित होमी भाभा कैंसर संस्थान के शुरू होने से कैंसर रोगियों को इलाज में राहत हुई। कम खर्च में लोगों को बेहतर इलाज मिल सके, इस उद्देश्य के साथ ही इसका संचालन कराया जा रहा है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रयास के बाद भी इस साल डेंगू का प्रकोप कम नहीं हुआ। दीनदयाल अस्पताल, मंडलीय अस्पताल और बीएचयू अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में जहां 300 से अधिक मरीज भर्ती हुए, वहीं इलाज के दौरान पांच की मौत भी हुई। केवल दीनदयाल अस्पताल में ही मार्च महीने से लेकर नवंबर तक 1300 लोगों की जांच हुई थी।

उधर, बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में 100 बेड के मदर-चाइल्ड केयर (एमसीएच) विंग का निर्माण कार्य भी इसी साल शुरू हुआ। यहां न केवल गर्भवती महिलाओं की जांच और डिलिवरी की सुविधा रहेगी, बल्कि बच्चों की भी हर तरह के जांच हो सकेगी।

प्रदेश सरकार की पहल पर चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के बगल में बन रहे चार मंजिला विंग का काम अगले साल अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। उधर दीनदयाल अस्पताल परिसर में भी 50 बेड का मेटर्निटी विंग बन रहा है, इसके बाद महिलाओं को इलाज के लिए परेशान नहीं होगा।
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इन योजनाओं की हुई शुरुआत

आयुष्मान भारत योजना
- बीएचयू में टेलीमेडिसिन सेंटर का रीजनल सेंटर
- बीएचयू अस्पताल में ऑनलाइन ओपीडी बुकिंग
- सरकारी-निजी अस्पतालों में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना
- खसरा से बचाव के लिए रूबेला टीकाकरण अभियान
- मंडलीय, दीनदयाल अस्पताल में कंप्यूटरीकृत पर्चा
- टीबी मरीजों की तलाशी के सक्रिय क्षय रोग अभियान
- इलाज के लिए नि:क्षय पोर्टल
- मानसिक रोगियों के लिए दुआ से दवा अभियान
- अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
- बीएचयू अस्पताल में स्मार्ट कार्ड की सुविधा
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