सआदत हसन मंटो की कहानी ‘साढ़े तीन आने’के भावपूर्ण मंचन के जरिए सोमवार की शाम रूम थिएटर के कलाकारों ने दर्शकों को बांधे रखा। युवा कलाकारों की एकल और समूह नाट्य प्रस्तुतियां सराही गईं। राष्ट्रीय नाट्य आंदोलन के दूसरे दिन यह प्रस्तुति पिपलानी कटरा स्थित श्रीश्री गुरु रविशंकर योग ध्यान केंद्र परिसर में की गई।
सबसे पहले अवितिको रूम थिएटर की परिकल्पना से स्थानीय संयोजक प्रतिमा सिन्हा ने लोगों को अवगत कराया। प्रतिमा का कहना था कि रूम थिएटर में जो श्रोता हैं, वहीं दर्शक और कलाकार भी हैं। शुरुआत हुई प्रतीक महंत के निर्देशन में सआदत हसन मंटो की कहानी ‘साढ़े तीन आने’ के मंचन से।इस नाटक के भावों ने दर्शकों को बांधे रखा। इसके बाद अरविंद गुप्ता, शैज खान, वैभव शर्मा, निखिल उपाध्याय, विकल श्रीवास्तव, सुचित केशरी ने ‘नंगी इंसानियत’, ‘संक्रमण’और ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन किया। इस मौके पर नाट्यविद कुंवर जी अग्रवाल, नरेंद्र आचार्य, डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र, रीता प्रकाश, शुभ्रा वर्मा, सौरभ चक्रवर्ती समेत कई युवा रंगकर्मी उपस्थित थे। रंगकर्मियों ने रूम थिएटर की परिकल्पना को रंगमंच के लिए वरदान बताया। नाट्य आंदोलन के संयोजक सलीम राजा ने आगत आतिथियों के प्रति आभार प्रकाश किया।