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प्रधान के चहेतों को मनरेगा का काम, बाकी को इंतजार

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वाराणसी/सेवापुरी/राजातालाब/रोहनिया। पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट का असर मनरेगा के काम पर भी दिख रहा है। गांव में गोलबंदी शुरू होने के साथ प्रधान के चहेतों को मनरेगा का काम ज्यादा मिल रहा है।
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जिले के ऑठों ब्लॉकों के 698 ग्राम पंचायतों में प्रधानी का चुनाव होना है। प्रवासी श्रमिकों की सूची ब्लाक स्तर से तैयार की गई है। इस नाते इन पर प्रधानों का जोर नहीं चल रहा है। प्रवासियों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान से जोड़ा जा रहा है। जबकि बाकी लोगों को काम दिलवाने में प्रधान मनमानी कर रहे हैं। नरसड़ा के ग्राम प्रधान अनूप कुमार सिंह बताया कि तीन दिनों के अंदर उनके गांव में 900 लोगों को काम दिया गया। बहुत से मनरेगा श्रमिक जॉब कार्ड बनवाने के बाद निष्क्रिय थे। किंतु इस समय लोग काम चाह रहे हैं। लिहाजा काम होने के बावजूद ज्यादा लोग आ जाते हैं। सभी लोगों को भिन्न-भिन्न कार्यस्थल पर लगाया गया। जिनके पास कार्ड और जो प्रवासी सूची में शामिल हैं। सबको काम दिया जा रहा है। आराजी लाइन में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में तीन करोड़ की धनराशि खर्च की गई है। पिछले दिनों पहले से पंजीकृत तथा बाद में जॉब कार्ड बनवाने वाले लोगों में काम देने के बाद यह धनराशि सीधे उनके खाते में भेजी गई। विकासखंड में 20848 लोगों ने काम मांगा था जिसके सापेक्ष 20809 को काम दिया गया। मोहनसराय की प्रधान कुसुम उपाध्याय ने बताया कि हमारे यहा मनरेगा के तहत निजी भूमि पर जल संरक्षण व मत्स्य पालन के लिए तालाब की खुदाई का काम कराया जा रहा है जिसमे 25 मजदूर कार्य कर रहे हैं। जितने मजदूर काम करते हैं सभी का जाब रजिस्टर पर प्रतिदिन चढ़ाया जाता है। सभी जरूरतमंदों को काम दिया जा रहा है।
घटती बढ़ती रहती है मजदूरों की संख्या
आराजीलाइन ब्लाक के 86 गांव में कार्य चल रहा है जिसमें 4800 मजदूर लगाए गए हैं। आराजीलाइन के मनरेगा लेखाकार अवधेश ने बताया कि जिन गांवों में मनरेगा के तहत काम होते हैं तथा जितने मजदूर काम में लगाए जाते हैं उनकी सूची कंप्यूटर पर उसी दिन दर्ज कर दी जाती है। काम करने वाले मजदूरों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है।
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बारिश के चलते प्रभावित हुआ है काम
मनरेगा के कार्य बारिश के बाद प्रभावित हुए हैं। गांव में चकरोड पर मिट्टी फेंके जाने और नालों तथा बाहों की खुदाई में मनरेगा श्रमिकों को लगाया गया था। बारिश के कारण तमाम गांवों-कस्बों में कार्य बंद है जबकि बहुत से गांव में कार्य हो चुके हैं। कई गांव में ऐसी सड़कें ही नहीं है जहां पर मिट्टी फेंका जा सके।
मनरेगा के कार्यों में इस तरह होती है भ्रष्टाचार
जॉब कार्ड बनने के बाद मजदूरों को उन्हें एक निश्चित संख्या आवंटित होने, कार्यों की ऑनलाइन सूचना देने और मानीटरिंग होने के बाद भी मनरेगा में भ्रष्टाचार होता है। सूत्रों के अनुसार मनरेगा में कई ऐसे लोग पंजीकृत होते हैं, जो प्रधान के चहेते होते हैं। बिना कार्य किये ही उनका नाम मास्टर रोल में चढ़ा दिया जाता है। जबकि तमाम मजदूरों के कार्य की हाजिरी कम काम किए जाने के बावजूद अधिक दिन चढ़ा दी जाती है। माप पुस्तिका भी ब्लॉक मुख्यालय बैठे-बैठे बन जाती है लिहाजा कितने घन फिट मिट्टी फेंकी गई है उसमें भी घालमेल हो जाता है। अधिक दिन हाजिरी भरे जाने के बाद श्रमिक समझौता कर लेते हैं और वास्तविक काम के बाद मिले धन की बंदरबांट होती है। श्रमिक फर्जी तौर पर भरे गये हाजिरी के दिनों का पैसा निकाल कर खुशी-खुशी अपने पास रखता है और बाकी वापस कर देता है। इस पैसे में सबकी हिस्सेदारी होती है। पिछले दिनों विकासखंड आराजीलाइन में एक रोजगार सेवक द्वारा एक मनरेगा श्रमिक से पैसे मांगने का ऑडियो भी वायरल हुआ था। लेकिन श्रमिक ने मनरेगा से काम छीने जाने के डर से इसकी शिकायत किसी से नहीं की।
मनरेगा के काम में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों कई रोजगार सेवकों पर कार्रवाई की गई थी। प्रधानों के अधिकार सीज हुए थे। जिसके बाद व्यवस्था ठीक हो गई। फिलहाल इस समय कहीं से किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिल रही है। -करुणाकर अदीब उपायुक्त श्रम एवं रोजगार मनरेगा
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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत मौजूदा आंकड़े
25 विभागों से कराए जाएंगे काम 125 दिन का काम मिलेगा
4×284 प्रवासी जिले में कर रहे हैं मनरेगा के तहत काम
44× ग्राम पंचायतों में हो रहा मनरेगा काम, 255 नहीं हो रहा मनरेगा काम
×477 प्रवासी श्रमिकों ने बनवाया जॉब कार्ड, 2676 प्रवासी कर रहे काम
698 ग्राम पंचायतों में ×4 ग्राम पंचायत हॉटस्पॉट, यहां नहीं हो रहा काम
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