थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि हत्यारोपियों ने घटना से पहले और बाद में जिन-जिन लोगों से संपर्क किया, उन सभी नंबरों को ट्रेस किया गया। अब तक 400 से अधिक कैमरों की जांच की जा चुकी है।
डीसीपी गोमती जोन नीतू के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में जौनपुर जिले के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के केशवपुर निवासी किशन कुमार और आशीष कुमार, समोगरा निवासी अजय कुमार व शिव मोहन राजभर और चोलापुर रैचनपुर निवासी प्रदीप भारद्वाज शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि सभी ने हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले 50-50 हजार रुपये के इनामी आरोपियों को जानबूझकर शरण दी। पहले इनपर 25 हजार का इनाम था। 26 अप्रैल की रात सड़क दुर्घटना को लेकर विवाद में युवा उद्यमी मनीष सिंह की घर से 100 मीटर की दूरी पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ही पुलिस मुख्य आरोपियों की तलाश में जुटी थी। शनिवार को आशीष राजभर, मनीष राजभर, गोविंद राजभर और नागेंद्र राजभर ने कोर्ट में सरेंडर की अर्जी दी।
कचहरी परिसर के आसपास देर रात पुलिस का घेरा : मनीष सिंह हत्याकांड के आरोपियों के संभावित सरेंडर की सूचना पर फूलपुर पुलिस ने रविवार देर रात कचहरी परिसर के आसपास सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया। पुलिस को इनपुट मिला था कि कुछ आरोपी सोमवार सुबह भीड़ का फायदा उठाकर अधिवक्ताओं के माध्यम से आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
छह दिनों तक मृतक के घर नेताओं का लगा जमावड़ा
हत्याकांड के बाद मृतक के परिजनों को सांत्वना देने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का मृतक मनीष सिंह के घर आना-जाना लगा रहा। इनमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, भाजपा विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, भाजपा एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह, सपा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्बू, रोहनिया विधायक सुनील पटेल, एमएलसी विनीत सिंह, सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ‘लक्कड़’, पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह, पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसु, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल पटेल, भाजपा नेता रजनीकांत मिश्रा, वीडीए बोर्ड सदस्य अम्बरीष सिंह भोला, क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष वीर सिंह वीरू, केसरिया भारत के राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानंद पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह शामिल रहे।