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मनीष अग्रवाल के आत्मदाह का मामला, प्रकरण की हो सीबीआई जांच

Wed, 20 Jan 2016 02:12 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
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प्रदेश सरकार और अफसर काशी की एतिहासिक धरोहरों को उजाड़ने की साजिश रच रहे हैं। गंगा से दो सौ मीटर दायरे में रहने वाले लोगों को उत्पीड़न किया जा रहा है।
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 इसी उत्पीड़न की वजह से सराफा कारोबारी मनीष अग्रवाल जान दे दी। ये बातें भाजपा नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने मंगलवार को पराड़कर भवन में प्रेस कांफ्रेंस में कहीं।
कहा कि वह विकास प्राधिकरण द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे लोगों के साथ हैं। 22 जनवरी को हाईकोर्ट में लोगों का पक्ष रखेंगे। उन्होंने मनीष के आत्मदाह प्रकरण की सीबीआई जांच की भी मांग की।
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 साथ ही, बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना किसी के मकान को गिराने की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों प्राधिकरण के अफसरों ने बिना किसी पूर्व सूचना के संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र के घर की तलाशी ली।
 जबकि उनके मकान की जांच करने का हाईकोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया था। इसी प्रकार शहर में गंगा किनारे रहने वाले 579 लोगों ने उत्पीड़न की जानकारी उन्हें दी है।
 विकास प्राधिकरण हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर लोगों को परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मनीष की मौत मामले में अब तक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज न किया जाना आश्चर्यजनक है।
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 प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद मनीष की पत्नी रिंकी ने कहा कि गंगा के किस बिंदु को मानक रखकर दो सौ मीटर की मापी की गई है, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं है।
अफसरों की प्रताड़ना से ही उनके पति ने जान दी। प्राधिकरण के अफसर फोन कर मकान गिराने की धमकी देते थे। उनके पास धमकी का ऑडियो टेप है।
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