शोभायात्रा के दौरान आकर्षक झांकियों ने मोहा जन मन।
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शिव की नगरी में कल कालिया नाग का मान मर्दन
वाराणसी। काशी के लक्खा मेले में शुमार नागनथैया की लीला मंगलवार को होगी। तुलसीघाट पर नागनथैया की लीला की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। गंगा में लीला के लिए लगाए जाने वाले पीपे को पेंट किया जा रहा है। घाट पर जगह-जगह बैरिकेडिंग की तैयारी भी हो रही है।
गोस्वामी तुलसीदास ने 498 साल पहले तुलसीघाट पर श्रीकृष्ण लीला की शुरुआत की थी। मंगलवार को तुलसीघाट पर होने वाली नागनथैया की लीला में गंगा यमुना का रूप धरेंगी और तुलसीघाट गोकुल में तब्दील हो जाएगा। 20 दिनों की लीला में नौवें दिन नागनथैया की लीला होती है। घाट की सीढि़यों से लेकर गंगा की लहरों पर नाव में सवार होकर लोग लीला का आनंद उठाते हैं।
काशीराज परिवार भी इस लीला का पीढि़यों से साक्षी बनता है। तुलसीघाट पर लीला की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सोमवार को काठ के कालिया नाग का रंगरोगन किया जाएगा। वहीं, लीला से पहले संकटमोचन मंदिर से कदंब की डाल भी काटकर लाई जाएगी। विधि-विधान से पूजन के बाद डाल को तुलसीघाट पर गंगा किनारे लगा दिया जाएगा। इसी डाल पर खड़े होकर भगवान कृष्ण गंगा में छलांग लगाएंगे।
संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास ने 498 साल पहले इस लीला की शुरुआत की थी। गोस्वामी तुलसीदास की देन है कि रामलीला के साथ ही भगवान कृष्ण की लीला भी काशी में जीवंत रूप में होती है। श्रीकृष्ण लीला में भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित कई लीलाओं का मंचन किया जाता है।