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Varanasi: देरी से उपचार तो कुपोषण हो सकता है जानलेवा, झाड़फूंक कराने में वक्त ना करें बर्बाद

Wed, 04 Jan 2023 09:10 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चे की बिगड़ती हालत का कारण लोग जादू-टोना मानकर पहले झाड़फूंक कराते हैं। समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो यह आगे चलकर जानलेवा हो सकता है। 
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दीनदयाल अस्पताल परिसर स्थित 10 बेड के एनआरसी पर इस समय चार बच्चे भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुपोषण एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो यह आगे चलकर जानलेवा हो सकता है। बच्चों को इस बीमारी के मकड़जाल में फंसने से बचाया जा सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूक भी किया जा रहा है। इस बीमारी के इलाज में न्यूट्रिशियन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी यानी पोषण पुनर्वास केंद्र) अहम भूमिका निभा रहा है।

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दीनदयाल अस्पताल परिसर स्थित 10 बेड के एनआरसी पर इस समय चार बच्चे भर्ती हैं। यहां बच्चों के इलाज के साथ ही मनोरंजन के साधन भी हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इलाज की सुविधाएं होने के बाद भी बहुत से लोग झाड़फूंक पर विश्वास रखते हैं।

पोषण पुनर्वास केंद्र की आहार सलाहकार विदिशा शर्मा बताती हैं कि कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चे की बिगड़ती हालत का कारण लोग जादू-टोना मानकर पहले झाड़फूंक कराते हैं और जब स्थितियां ज्यादा खराब हो जातीं हैं तब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है। बच्चों में कुपोषण का लक्षण नजर आते ही स्वास्थ्य केंद्र या एनआरसी ले जाना चहिए ताकि उसका सही उपचार हो सके।

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कम हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

दीनदयाल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सिंह का कहना है कि आहार में पोषक तत्वों की कमी कुपोषण की वजह है। इसके कारण बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। कुपोषण के कारण बच्चे में एनीमिया, मानसिक विकलांगता जैसी बीमारियां भी होतीं हैं। यदि इसका इलाज समय पर नहीं कराया गया तो इसे बाद में ठीक कर पाना मुश्किल होता है।
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इन बातों का रखें ख्याल

  • बच्चों को छह माह तक मां के दूध के अलावा कुछ भी न दिया जाए।
  • छह माह से दो वर्ष तक के बच्चे को स्तनपान कराने के साथ-साथ ऊपरी पोषक आहार दिया जाए।
  • शुरुआत में बच्चों को फलों का जूस या दाल का पानी चावल का माड़ दिया जा सकता है।
  • छोटे बच्चों को दांत नहीं निकला होता लिहाजा उसे उबला या भाप में पकाया हुआ सेब, गाजर, लौकी, आलू या पालक आदि मसल कर देना चाहिए।
  • शिशु को पोषक आहार मिले, इसके लिए एक बेहतर और संतुलित आहार योजना का पालन करना चाहिए।
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