पुण्यकाल शुरू होने से पहले ही गुरुवार को मकर संक्रांति स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। सिर पर गठरी, कंधे पर झोला लिए लोग गंगा घाटों की ओर बढ़ने लगे।
सुबह कई घाटों पर स्नान, दान के लिए भीड़ के चलते उत्सव जैसा नजारा रहा। वैसे सूर्य मकर राशि पर शुक्रवार की सुबह 7:46 बजे प्रवेश करेंगे और स्नान का पुण्यकाल आठ घंटा पहले यानी रात 1: 46 बजे से शुरू हुआ,
लेकिन दूसरे प्रांतों और इलाकों से आने वाले संक्रांति का गोता गुरुवार की सुबह से ही लगाने लगे। सूर्य के उत्तरायण होते ही शुभ कार्य भी आरंभ हो जाएंगे।
मकर संक्रांति स्नान के लिए गंगा तटों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने लगे है। भीड़ को देखते हुए सुबह ही चार पहिया वाहनों का गिरजाघर, मैदागिन, सोनारपुरा से गोदौलिया-दशाश्वमेध की ओर प्रवेश रोक दिया गया।
सुबह छह बजे तक अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राजघाट, प्रह्लाद घाट पर स्नानार्थियों की भीड़ लग गई। लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई और तिल, गुड़, चूड़े के अलावा गर्म कपड़ों का गरीबों में दान किया।
खिचड़ा बाबा के दरबार में खिचड़ी खाने के लिए भी कतार लगी रही। दोपहर बाद बसों, निजी वाहनों के अलावा ट्रेनों से बड़ी तादाद में श्रद्धालु मकर स्नान के लिए काशी पहुंचने लगे।
दशाश्वमेध के चितरंजन पार्क के अलावा सड़कों की पटरियों और घाटों पर रात से ही भीड़ लग गई। गरीब बच्चों, महिलाओं की लंबी कतारें घाटों पर लग गईं।
वाहनों की कतारें लगने से गोदौलिया, बांसफाटक के अलावा राजघाट जाने वाली सड़कों पर रात को ही जाम की स्थिति बन गई। मकर स्नान को देखते हुए गंगा के प्रमुख घाटों पर बैरीकेडिंग करा दी गई है।
20 मीटर से आगे श्रद्धालु न जा सकें, इसके लिए नावों पर जल पुलिस के जवानों के अलावा गोताखोरों की भी तैनाती कर दी गई है।
आधी रात को ही गोदौलिया, दशाश्वमेध की ओर जाने वाले मार्गों पर चार पहिया, दो पहिया वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। इस मार्ग पर शुक्रवार को सिर्फ पैदल स्नानार्थी ही चलेंगे।