मंत्री व संयोजक दिलीप सिंह ने बताया कि चार दशक पूर्व जब शिव बरात की शुरूआत हुई थी तो काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत स्व. कौशल पति त्रिपाठी से हमने पंचबदन प्रतिमा की मांग की थी। उस दौरान महंत ने कहा था कि पहली बार आप लोग शिव बरात निकाल रहे हैं और शायद अगली बार न निकालें। ऐसे में हम यह शिव प्रतिमा नहीं दे पाएंगे।
बहुत आग्रह करने पर उन्होंने संकल्प लिया कि अगर 40 साल तक शिव बरात निकलती रही तो 41वें वर्ष में प्रतीक शिवलिंग के स्थान पर पंच बदन रजत शिव की प्रतिमा शामिल होगी। महंत के पुत्र कुलपति तिवारी अब इस संकल्प को पूरा करेंगे और पहली बार शिव बरात में पंचबदन प्रतिमा को शामिल किया जाएगा।
शिव बरात में काशी की गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा भी देखने को मिलेगा। सांड़ बनारसी दूल्हा और व्यापारी नेता बदरुद्दीन अहमद दुल्हन बनेंगे। बरात में भूत, पिशाच, बेताल, सपेरे, मदारी, साधु-संन्यासी, देवी-देवता, जादूगर, बैंडबाजा, ढोल, नगाड़ा से सुसज्जित सात समंदर पार से आए विदेशी आकर्षक के केंद्र होंगे।
समिति की ओर से बनारस के अस्सी घाट पर शिव बारात पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें शिव बरात की फोटो लगाई गई। प्रदर्शनी को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ लगी रही।