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महासमागम : रुद्राक्ष में जली ज्वाला मां की ज्योति, गूंजा हर-हर महादेव; पाकिस्तान-बांग्लादेश के लोग बने साक्षी

Sun, 01 Dec 2024 05:18 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : इस आयोजन का उद्देश्य भी यही है कि इस दिशा में कोई समाधान का मार्ग निकाला जाए। 51 शक्तिपीठों को एक दूसरे से जोड़ा जाए। विशालाक्षी देवी के महंत राजनाथ तिवारी ने कहा कि काशी में शिव और शक्ति दोनों हैं, लेकिन उनके बीच सामंजस्य का अभाव है। यह आयोजन सनातन धर्म को एकसूत्र में पिरोने का प्रयास है।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में माता की प्रतिमा और ज्योतिर्लिंग का अनावरण करते डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के इतिहास में पहली बार एक छत के नीचे 51 शक्तिपीठ और द्वादश ज्योतिर्लिंग के अर्चक व पुजारी एकत्र हुए। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से ज्वाला देवी की ज्योति को रुद्राक्ष के मंच पर प्रतिष्ठित किया गया। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ की मिट्टी से निर्मित शिवलिंग और मां सती की प्रतिमा की स्थापना के साथ महासमागम आरंभ हो गया।

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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में सेंटर फॉर सनातन रिसर्च एवं ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से दो दिवसीय द्वादश ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ महासमागम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की शुरुआत लोकगायक अमलेश शुक्ला के भजनों से हुई। इसके बाद डॉ. सोमा घोष ने शिवतांडव की प्रस्तुति दी। 

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इसके बाद बीएचयू के छात्रों ने मां सती के जन्म और शक्तिपीठों की उत्पत्ति नृत्य नाटिका का मंचन किया। डॉ. सोमा घोषा ने बनारस के कवि संजय मिश्र की लिखी रचना सुनो-सुनो शक्तिपीठ की कहानी, भक्ति में डूबी भक्त की कहानी... सुनाई। गीतों के बोल पर कलाकारों ने शिव-शक्ति के नृत्य का मंचन किया।

इसके पहले विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, प्रखर महाराज, महाराष्ट्र के जितेंद्र नाथ महाराज, कोलकाता काली पीठ के रमाकांत महाराज, देवघर के प्रकाशानंद महाराज, कामेश्वर नाथ उपाध्याय, आयोजक डॉ. रमन त्रिपाठी ने दीप जलाकर समागम का शुभारंभ किया।

वाराही शक्तिपीठ भी काशी में
प्रखर आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर प्रखर महाराज ने दावा किया कि काशी में एक नहीं दो-दो शक्तिपीठ हैं। एक माता विशालाक्षी का और दूसरा वाराही देवी का। वाराही शक्तिपीठ को लेकर जो अनिर्णीत विवाद है, उसका समाधान यही है कि वह शक्तिपीठ और कहीं नहीं अपितु काशी में ही है। 

शास्त्रों में वर्णन है कि वाराही देवी पंचसागर में अवस्थित हैं, जिस प्रकार का वर्णन है और जो मान्यता उनके महाराष्ट्र में होने की है वहां जाने पर ऐसा कुछ नहीं मिलता है। काशी में पंचगंगा घाट पर पांच नदियों का संगम होता है, इससे यह सिद्ध होता है कि वाराही देवी शक्ति पीठ काशी में ही विराजमान हैं।
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महासमागम में 51 शक्तिपीठ की एकता का निकलेगा मार्ग
सेंटर फॉर सनातन रिसर्च एवं ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रमन त्रिपाठी ने कहा कि आयोजन में सनातन धर्म के प्रमुख स्थलों के बीच सामंजस्य की कमी और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा होगी। इस समागम का उद्देश्य न केवल धर्मस्थलों के बीच एकता स्थापित करना है, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार और संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में शक्तिपीठों की स्थिति ठीक नहीं है। अगर हमारे शक्तिपीठों में एकता होती तो उनकी ऐसी स्थिति नहीं होती। 

भारत आने से पहले ही गिरफ्तार हुए बांग्लादेश के तीन प्रतिनिधि
सेंटर फॉर सनातन रिसर्च एवं ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रमन त्रिपाठी ने बताया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के प्रतिनिधि बनारस आए हैं। बांग्लादेश से छह प्रतिनिधि बनारस आ रहे थे, लेकिन उसमें से तीन को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं पाकिस्तान से दो प्रतिनिधि इस महासमागम में शामिल हो रहे हैं। सुरक्षा कारणों से उनको आम जनता के बीच नहीं लाया गया है।
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