महाराणा प्रताप की जयंती पर बृहस्पतिवार को लोगों ने उन्हें याद किया। उनकी वीरगाथा का गुणगान किया। कैंट स्थित एक होटल में आयोजित जयंती समारोह में लोगों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा के समक्ष हल्दीघाटी की पवित्र मिट्टी से पूजन किया। पुष्पांजलि और दीपांजलि कर नमन किया।
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र सिंह ने कहा कि अगर महाराणा प्रताप न होते तो आज का भारत नहीं होता। उन्होंने अपने अद्भुत व अद्वितीय पराक्रम और सामाजिक समरसता के साथ अपने राज्य और देश की अस्मिता को स्वतंत्र और जीवंत रखा। वह आज भी भारतीय गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप भारतीयों की प्रेरणा और प्राण हैं। उनकी गौरवगाथा घर-घर में और इतिहास में उच्च स्थान पर सुशोभित होनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संबद्धता समन्वयक डॉ. आनंद सिंह अन्नू ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने राष्ट्र के सम्मान को नहीं त्यागा और आखिरी समय तक मुगलों से लड़ते रहे। अध्यक्षता अजय सिंह ने की। इस दौरान लोगों से मतदान करने की अपील की गई। संयोजन अजय सिंह बांबी और धन्यवाद ज्ञापन ठाकुर कुश प्रताप सिंह ने किया। इस मौके पर पूर्व पार्षद कुंवर कांत सिंह, माने सिंह, डॉ. श्रवण कुमार, इंद्रजीत सिंह, शिवम पांडेय आदि रहे।