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Varanasi News: सवा लाख पार्थिव शिवलिंग के रुद्राभिषेक के साथ हुआ महामृत्युंजय जाप, भक्तों ने नवाया शीश

Thu, 08 Aug 2024 05:37 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: संत पंजाबी महाराज के जन्मोत्सव पर विभिन्न आयोजन हुए। रामजानकी मठ में विहंगम कार्यक्रम में सैकड़ों भक्तों ने प्रभु का महारुद्राभिषेक किया।
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कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संत पंजाबी महाराज के जन्मोत्सव पर राम जानकी मठ ट्रस्ट में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का महारुद्राभिषेक, सहस्त्रार्चन और महामृत्युंजय जाप हुआ। 11 वैदिक विद्वानों और मठ के बटुकों ने पं. उमाकांत याज्ञिक के आचार्यत्व में सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों की गणेश पूजा की। इसके बाद पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से स्नान कराया।

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पार्थिव शिवलिंगों के अभिषेक के बाद अंगवस्त्रम व सुगंधित फूल, फल और मिष्ठान्न से शृंगार हुआ। आरती उतारकर विश्वकल्याण और मानव जीवन में सुख शांति व समृद्धि के लिए ईश्वर से मंगल कामना की प्रार्थना की गई। वहीं, दूसरी ओर महामृत्युंजय जाप का पाठ चलता रहा। 

कार्यक्रम में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चित्रकूट ओर इलाहाबाद से आए भक्तों ने दूध और बेलपत्र से भगवान शिव का पूजन किया। मंत्रोच्चारण की गूंज से पूरा मठ प्रांगण शिवमय हो गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु पादुका का पूजन किया गया। 
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मठ के प्रभारी संत रामलोचन दास ने बताया कि संत पंजाबी महाराज के जन्मोत्सव पर मानव कल्याणार्थ सावन मास में शिव की नगरी काशी में सामूहिक महारुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। पार्थिव शिवलिंग के पूजन से सभी प्रकार की मनोरथ सिद्ध होते हैं। मठ में बृहस्पतिवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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धर्म की सिर्फ पूंछ भी पकड़ ली तो कर जाओगे भवसागर पार: शंभु शरण महाराज

मारवाड़ी संघ भवन लक्सा में रामकथा के दौरान सजी राधा कृष्ण की झांकी। - फोटो : अमर उजाला
कथा मर्मज्ञ शंभु शरण लाटा महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में एक सद्गुरु जरूर होना चाहिए। सच्चा संत सृष्टि तो नहीं बदलता सकता है, लेकिन दृष्टि जरूर बदल देता है। 

डोकानिया गौ सेवा गोविंद सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से लक्सा स्थित मारवाड़ी समाज भवन में चल रही श्रीरामकथा के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा की जीवन में लज्जा का भाव बहुत महत्वपूर्ण है। समाज में जितनी निर्लज्जता होगी, उतनी ही अशांति बढ़ेगी। धर्म और कर्म पर कभी लगाम न लगाओ। अगर, धर्म की सिर्फ पूंछ भी पकड़ ली तो भवसागर पार कर जाओगे।

संत लाटा ने कहा कि मान-अपमान सिर्फ मन का भेद है। इस मनुष्य जन्म का सदुपयोग करो, इसे राग द्वेष में ना लगाओ। जीवन को पुरुषार्थ में लगाओ। इसके लिए श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता है और जब यह दोनों हो जाता है तो ज्ञान स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। 

शाम को वृंदावन से आई श्रीराधा कॄष्ण लीला संस्थान के कलाकारों ने फूलों की होली खेल शिव विवाह का उत्सव मनाया। इस दौरान कथाप्रेमियों ने नृत्य भी किया। रामायण का सामूहिक पाठ हुआ। मुख्य यजमान सजन कुसुम डोकानिया एवं कुसुम देवी डोकानिया ने व्यासपीठ का पूजन किया। अंत में आरती में अंकित डोकानिया, पारुल डोकानिया, आलोक डोकानिया, काजल डोकानिया, श्वेता मुरारका आदि रहीं।
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