बाबा का मिला आशीर्वाद
चेतगंज की किरण गुप्ता ने बताया कि मैं हर साल बाबा की रंगभरी एकादशी पर दर्शन करने आती हूं। पहली बार बाबा काशी की गलियों में गौरा के गौने के लिए निकले यह हमारे लिए तो सबसे बड़ा आशीर्वाद है। महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि यही एक दिन होता है जब बाबा खुद भक्तों के संग होली खेलते हैं। आज पहली बार बाबा भक्तों को आशीष देने गौरा के साथ काशी की गलियों में निकले हैं।
1934 में स्वरूपरानी ने किए थे बाबा के दर्शन
सन 1934 में जब स्वतंत्रता संग्राम संग खादी अभियान भी गर्म था, रंगभरी एकादशी पर पं. जवाहरलाल नेहरू की मां स्वरूपरानी बाबा का दर्शन करने आई थीं। उन्होंने देवाधिदेव की रजत प्रतिमा को खादी धारण कराने की इच्छा महंत परिवार से जाहिर की। उन्होंने तत्कालीन महंत पं. महावीर प्रसाद तिवारी को इससे संबंधित पत्र सौंपा था।