महामंडलेश्वर प्रखर महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म में यज्ञ की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। धर्म ग्रंथों में मनोकामना पूर्ति व किसी बुरी घटना को टालने के लिए यज्ञ करने के कई प्रसंग मिलते हैं। वह रविवार को शंकुल धारा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में 51 दिवसीय लक्षचंडी महायज्ञ में यज्ञ से होने वाले लाभ के बारे में बता रहे थे। प्रात:काल गणपति पूजन के पश्चात यज्ञशाला में विराजमान भगवान के प्रतिरूप का पूजन हुआ। 250 ब्राह्मणों ने पोखरे में जेटी पर बैठकर प्रात:कालीन व संध्यावंदन के उपरांत दुर्गाशप्तशती पाठ का वाचन किया। इस दौरान आरएसएस के इंद्रेश कुमार, आचार्य गौरव शास्त्री, आत्मबोधप्रकाश ब्रह्मचारी, चंदन सिंह, गोलू सिंह, अमित पसारी, दिशा पसारी, तनीषा अरोड़ा, गौरव तिवारी, अंकित अग्निहोत्री, कुलदीप तिवारी मौजूद रहे।