माफिया मुख्तार अंसारी को अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 यानी धोखाधड़ी, 467 यानी बहुमूल्य सुरक्षा, वसीयत आदि की जालसाजी और 468 यानी ठगी के मकसद से जालसाजी का दोषी पाया, जिस पर सजा सुनाई गई। भारतीय दंड संहिता की इन धाराओं के तहत अधिकतम दस साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा मुख्तार अंसारी को आयुध अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी पाया गया है। इसके तहत अधिकतम छह माह की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है।
यूपी, दिल्ली और पंजाब में मुख्तार के खिलाफ 65 मुकदमे
गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद थाने के हिस्ट्रीशीटर और यूसुफपुर निवासी मुख्तार अंसारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में 65 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। 25 अक्तूबर 2005 से जेल में बंद मुख्तार अंसारी को अब तक सात मामलों में अदालत सजा सुना चुकी है। वाराणसी के वर्ष 1991 के अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। लखनऊ के दो मामलों, गाजीपुर के चार मामलों और वाराणसी के एक मामले में मुख्तार अंसारी को पांच वर्ष छह माह से लेकर 10 वर्ष तक की सजा से दंडित किया जा चुका है। फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण आठवां ऐसा मामला होगा, जिसमें मुख्तार को सजा सुनाई जाएगी।