सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी आने और हांफने की शिकायत ब
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भोले की नगरी में इंटरस्टीशियल लंग डिजीज(आईएलडी) नामक फेफड़े की घातक बीमारी ने जन्म ले लिया है। इस बीमारी की चपेट में आने वालों के दिल की धड़कनें सुस्त होने के साथ ही सांस लेने की क्षमता भी घट रही है। फेफड़े में जाला बन जा रहा है।
इस बीमारी के फैलने की तीन प्रमुख वजहें सामने आई हैं। धूम्रपान, सड़कों पर उड़ती धूल और वाहनों का धुआं। बीएचयू के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. एसके अग्रवाल के एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
उनका कहना है कि जल्द धूल, धुआं से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए तो, आने वाले समय में यह बीमारी भयावह रूप धारण कर सकती है। वाराणसी देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है।
बनारस की सड़कों पर उड़ती धूल, कारखानों के धुएं सांस के सहारे फेफड़े में पहुंच कर जाला बना रहे हैं। इससे इंटरस्टीशियल लंग डिजीज नामक बीमारी फैल रही है। इस बीमारी के पीड़ितों की पहचान सांस लेने में तकलीफ होने, सूखी खांसी आने और हांफने लक्षणों से हो रही है।
महिलाओं के फेफड़े में क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज(सीयूपीडी) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। प्रो. एसके अग्रवाल बताते हैं कि सामान्य तौर पर पांच वर्ष पहले तक पीक एम्पीरेटरी फ्लोरेट(पीईएफआर) प्रति व्यक्ति 600 लीटर प्रति मिनट थी लेकिन अब 340 पर आ गई है।
यानी 160 लीटर प्रति मिनट पीईएफआर घट गई है। यानी फेफड़ा तेजी से कमजोर हो रहा है। प्रो. अग्रवाल कहते हैं कि रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में यह फेफड़े की नंबर वन बीमारी बन जाएगी।