आरोप है कि बाद में कंपनी ने फर्जी रसीदें और बांड पेपर जारी कर बड़े स्तर पर धन एकत्र किया। फरवरी 2024 में निवेशकों को ठगी का शक तब हुआ, जब भुगतान के लिए कंपनी कार्यालय जाने पर लगातार टालमटोल की जाने लगी। इसके बाद जनवरी 2025 तक पैसा लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसी भी निवेशक को रकम वापस नहीं मिली।
पीड़ितों का कहना है कि कुल 3,65,98,254 रुपये की धनराशि कंपनी में जमा कराई गई थी, जो अब तक वापस नहीं मिली है। आरोप है कि बड़ी रकम इकट्ठा करने के बाद कंपनी के जिम्मेदार लोग फरार हो गए।
थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।