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Varanasi News: प्रेम की भाष प्रेमी समझे, जग वाले तो मूरख है ...।

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ददरी मेला के भारतेंदु मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान पुस्तक का विमोचन करते राज्यमंत्री दानि? - फोटो : BALLIA
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बलिया। ददरी मेला के भारतेंदु मंच पर बुधवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों और कवियित्रियों ने श्रोताओं में अपनी रचनाओं से कभी प्रेम रस बरसाया तो कभी देशभक्ति का जज्बा भरा। इसके पूर्व, कवि सम्मेलन का शुभारंभ अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी तथा विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने किया।
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संचालन कर रहे दमदार बनारसी ने अपने काव्य रचना तथा हास्य व्यंग्य से लोगों को खूब गुदगुदाया। रीना झा शर्मा ने अभी सूखे सजर के साख पर उगाना हैं ... आदि रचनाओं से खूब वाहवाही लूटी। इसके उपरांत, नोएडा से आई पल्लवी त्रिपाठी ने प्रेम की भाषा प्रेमी समझे, जग वाले तो मूरख है ... सुनाया। हास्य कवि सुदीप भोला ने श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। उन्नाव से आए स्वयं श्रीवास्तव ने मुश्किल में भी संभालना घर के वास्ते...। डॉ. प्रशांत सिंह ने हाथ बांधे साथ चलना चाहिए, पूछकर घर से निकला चाहिए..। सुनाकर पत्नियों पर चुटकी ली। कल्याण सिंह विशाल ने शृंगार रस की कविता सुनाई। लखनऊ से आए अतुल वाजपेयी ने बल, बुद्धि, पराक्रम के सागर जिनके आयुध धनु सायक है...। के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन किया। दिल्ली से आए गजेंद्र सौलंकी ने माहौल को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। मेरठ से पधारे सौरभ जैन सुमन ने आतंकवाद पर प्रहार किया। संयोजक दानबहादुर सिंह ने वर्तमान परिवेश और समाज में माता-पिता की हो रही उपेक्षा को कविताओं के माध्यम से उद्धृत किया। मौके पर ददरी मेला से जुड़ी यादों वाली पत्रिका का विमोचन भी अतिथियों ने किया।
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