ऑनलाइन पूजा, सेवा नियमावली और विकास की योजनाओं को लेकर चल रही खींचतान के बीच काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी को हटा दिया गया है। उन पर विस्तारीकरण की योजनाओं की अनदेखी करने के अलावा बड़े राजनेताओं और उद्योगपतियों का पौरोहित्य करने का भी आरोप है।
हालांकि अध्यक्ष को पद से हटाने संबंधी शासन का आदेश शनिवार की देर रात तक सीईओ कार्यालय को नहीं मिला था लेकिन धर्मार्थ कार्य मंत्री विजय मिश्र ने इसकी पुष्टि की। फिल्म अभिनेता डिनो मॉरियो की कंपनी आई भक्ति को ऑनलाइन प्रसाद, आरती और पूजा के करार की संस्तुति न करने के मामले में अध्यक्ष और अफसरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई थी।
अमेरिकी कंपनी क्लाउडडाटा लैब्स की तकनीक से जुड़ी मुंबई की डीओटी साल्यूसन प्राइवेट लिमिटेड से बाबा विश्वनाथ के प्रसाद, आरती और रुद्राभिषेक की ऑनलाइन सेवा के लिए हुए करार के बाद अध्यक्ष और अफसरों में छिड़ी खींचतान की परिणति के रूप में इसे देखा जा रहा है। इस कंपनी की वेबसाइट आईभक्ति के जरिए ऑन लाइन आरती के लिए गर्भगृह में हाई डेफिनेशन वायरलेस कैमरा लगाने और मॉनीटर कंट्रोल रूम मंदिर के बाहर स्थापित किए जाने के बाद इस करार पर उंगली उठने लगी थी।
इस करार की जानकारी न होने और इसे न्यास की बैठक में न रखे जाने की बात कहने के बाद अध्यक्ष की घेरेबंदी शुरू हो गई थी। पता चला है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भूटान नरेश के लिए मंदिर में पूजा कराने के मामले को भी प्रशासन ने आपत्तिजनक माना है। पं. अशोक द्विवेदी के विरुद्ध लगे आरोपों में कहा गया है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए पौरोहित्य का काम कराना नियम संगत नहीं है लेकिन द्विवेदी ऐसा कराते रहे। विकास योजनाओं में अवरोध खड़ा करने को भी आधार बनाया गया है। पांच महीने पहले न्यास की बैठक में सेवा नियमावली का प्रस्ताव लाया गया था। इसमें 187 पद सृजित करने का प्रस्ताव भी न्यास अध्यक्ष ने फिजूलखर्ची बता टाल दिया था।