भजनों की भी दी गई प्रस्तुति।
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प्रथम प्रस्तुति गायक गणेश पाठक ने अपने भजन "जय जय हे तुलसी माता" से तुलसी की महिमा व भगवान विष्णू का गुणगान किया। द्वितीय प्रस्तुति के रुप में बिंदुमाधव ने 'अच्युतम केशवम' से माहाैल को भक्तिमय बना दिया।
अंतिम प्रस्तुति गायक राकेश तिवारी ने 'श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव' से श्रोताओं को झुमने के लिए मजबूर कर दिया। तबले पर नमन पांडेय ने व की-बोर्ड पर कुलदीप ने संगत की। इस अवसर पर आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन, अच्युत पटवर्धन, संतोष सोलापुरकर, स्वप्निल पाठक, दिनेश श्रीवास्तव, संजय ब्रह्में, सुहास कापशे आदि रहे।