पाठक ने नेपाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि काठमांडू के मेयर बालेन शाह के प्रभाव और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच ओली की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद की परिस्थितियों ने कई पुराने विवादों को फिर से उभार दिया है।
अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए अरुण पाठक ने कहा कि एक नाट्य मंचन को लेकर उनका इतना विरोध हुआ कि उन्हें पिछले पांच वर्षों से अपने परिवार से दूर रहना पड़ रहा है। उन्होंने इसे 'विचारों की लड़ाई' बताते हुए कहा कि आज जो कुछ भी हो रहा है, वह उनके लिए “न्याय” जैसा महसूस होता है।
इस पूरे बयान को राजनीतिक विश्लेषक दक्षिण एशियाई राजनीति में बढ़ती वैचारिक टकराहट के रूप में देख रहे हैं। नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक व धार्मिक मुद्दों पर समय-समय पर बयानबाजी होती रही है, जो दोनों देशों की आंतरिक राजनीति को भी प्रभावित करती है।