बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में रविवार को परशुराम जयंती मनाई गई। भगवान परशुराम के जीवन परिचय, शस्त्र, शास्त्र और शास्त्रार्थ विषय पर गोष्ठी हुई। शोध छात्र प्रशांत राय ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि ज्ञान, न्याय और धर्म के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें शौर्य और शास्त्र के संतुलन की प्रेरणा लेनी चाहिए। भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदेंदु तिवारी ने कहा कि परशुराम का व्यक्तित्व भारतीय चिंतन की उस परंपरा को दिखाता है। इसमें शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन बहुत जरूरी है। आज के दौर में बौद्धिक विमर्श (शास्त्रार्थ) के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। मुख्य वक्ता डॉ. नीति सिंह ने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य के पक्ष में संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। डॉ. शिल्पा सिंह ने कहा कि परशुराम जी का जीवन केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ज्ञान, तपस्या और अनुशासन का अद्भुत संगम है। डॉ. धीरेंद्र राय ने उनके आदर्शों को वर्तमान समाज में प्रासंगिक बताया।